Story of Guru Nanak Dev Ji History in Hindi, Biography, Teachings, Essay, Birth, Death, Jayanti

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको सिक्ख धर्म के संस्थापक “Guru Nanak Dev Ji history in Hindi” बताने वाले हैं। पूरी दुनिया को अपने दिव्य-ज्ञान से प्रकाशित करने वाले गुरु नानक देवजी का जीवन परिचय अनुकरणीय हैं। 

“Guru Nanak Dev Ji biography in Hindi”  के अंतर्गत इनके परिवार, शिक्षा, शुरवाती जीवन, पत्नी, ज्ञान की प्राप्ति, आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई हैं। 

Story of Guru Nanak Dev Ji History in Hindi
Guru Nanak Dev Ji History in Hindi, (Images)


Quick biography of Guru Nanak Dev ji (मुख्य बिंदु) 

  • नाम – गुरु नानक देव 
  • जन्म – 29 नवंबर 1469
  • स्थान – तलवंडी (पंजाब : पकिस्तान)
  • पिता – मेहता कालू 
  • जननी – माता तृप्ता 
  • बहन – बेबे नानकी
  • पत्नी – माता सुलक्खनी 
  • पुत्र – श्री चंद
  • संस्थापक – सिक्ख धर्म 
  • मृत्यु – 22 सितम्बर 1539 
  • आयु – 70 वर्ष 

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Guru Nanak Dev Ji History in Hindi (जीवन परिचय) :

सिक्खों के पहले गुरु, गुरु नानक देवजी का जन्म 29 नवंबर 1469 को पकिस्तान के तलवंडी में हुआ था। जिसे अब ननकाना साहेब के नाम से जाना जाता हे। इनके पिता का नाम “मेहता कालू” और माता का नाम “माता तृप्ति” था। ये एक खत्री परिवार में जन्मे थे। 

इनकी बहन का नाम बेबे नानकी था जिनका विवाह “जय राम” के साथ हुआ था। बचपन से ही अनेक गुणों के धनि गुरु नानक को जब ज्ञान की प्राप्ति हुई, तब उन्होंने विश्व भर के लोगों के साथ इसे बाटने का निर्णाय किया। 

तब कई देशों की पैदल यात्रा करके गुरूजी ने लाखों लोगों का मार्गदर्शन किया। इनके शुरवाती जीवन, ज्ञान प्राप्ति की कथा और उपदेशों की जानकरी आगे दी गई हैं। 


Guru Nanak Dev Ji family tree, father, mother, sister (परिवार) : 

गुरु नानक का जन्म एक माध्यम वर्गीव परिवार में हुआ था। इनके पिता “मेहता कालू” एक पटवारी थे, वे चाहते थे की उनका बेटा भी पढ़ लिखकर किसी अच्छे पद पर काम करें। इनकी जननी “माता तृप्ता” एक गृहणी थी। 

गुरुदेव अपनी बहन “बेबे नानकी” से बहुत प्रेम करते थे। लेकिन, वर्ष 1475 में बेबे नानकी का विवाह “जय राम” के साथ हो गया। तब गुरु नानक भी अपनी बहन के साथ उनके ससुराल “सुलतानपुर” चले गए। 

लेकिन, 27 वर्ष की आयु तक वहां रहने के बाद, इन्हे दिव्य-ज्ञान की प्राप्ति हुई और फिर ये विश्व भ्रमण के लिए निकल पड़े। 


Shri Guru Nanak dev ji essay in hindi (शुरवाती जीवन) :

गुरु नानक का शुरवाती जीवन ऐसी कई कहानियों से भरा हुआ, जिससे ये प्रमाण मिलता हे की भगवान् ने इन्हें कई दिव्य शक्तियां प्रदान की थी। इनके बचपन की कुछ कहानियां भी बहुत प्रचलित हैं। 

पहली कहानी : जब इनकी उम्र 7 वर्ष थी, तब इनके पिताजी ने इन्हें गुरु के पास शिक्षा लेने के लिए भेजा। तब शिक्षक ने इन्हें वर्णमाला लिखने को कहा। तो अधभूत शक्तियों के धनि गुरु नानक ने भगवान् का गणितीय प्रतिरूप अपने शिक्षक को दिखाया। 

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जिसे देख कर शिक्षक अचंभित रह गए और उन्होंने गुरुनानक के पिताजी से कहा की, वे इतने प्रतिभाशाली बच्चे को पढ़ाने में असमर्थ हैं। 

दूसरी कहानी : एक बार इनके पिताजी ने इन्हे व्यापर शुरू करने के लिए 20 रुपए दिए। तो करुणा और सन्यासी भाव का परिचय देते हुए गुरुनानक ने उन पैसों से खाना ख़रीदा और ज़रूरतमंदों में बाँट दिया। घर आकर अपने पिता से कह दिया की आज में सच्चा सौदा करके आया हूँ। 


Gurunanak Dev Ji marriage, wife, son, daughter (शादी) :

18 साल की उम्र में 24 सितम्बर 1487 को गुरु नानक का विवाह “माता सुलक्खनीके साथ हुआ। इनका वैवाहिक जीवन ज्यादा लमबा नहीं रहा। इन्हे एक पुत्र की भी प्राप्ती हुई,  जिसका नाम “श्री चंद” रखा गया। 


Story of Guru Nanak Dev Ji in hindi (ज्ञान प्राप्ति की कहानी) :

सन् 1475 में बहन के साथ सुल्तानपुर चले जाने के बाद, इन्होनें अपनी बहन के देवर के साथ काम करना शुरू कर दिया। ये हर रोज़ सुल्तानपुर की नदी में नहाने जाते थे और वही कुछ देर एकांत में भगवान् का ध्यान भी करते थे। 

लेकिन, सन् 1496 में ये अपनी दिनचर्या क्वे अनुसार नदी में नहाने गए और 3 दिनों तक घर नहीं आए। इस दौरान ये जंगल में चले गए और बहुत गहरी तपस्या की। जिसके परिणामस्वरूप, गुरु नानक देव को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया। 

जैसे ही ये अपनी तपस्या से उठे, इनके मुख से निकलने वाले पहले शब्द थे – 

कई भी इंसान हिन्दू या मुसलमान नहीं हैं 

इसके बाद, अपने ज्ञान और बुद्धि को लोगो को बाटते हुए, इन्होने सिक्ख धर्म की स्थापना की। 

Contribution in “Bhakti – Movement” (भक्ति आंदोलन में सहयोग) :

8विं शताब्दी से 16विं शताब्दी तक चले भक्ति आंदोलन में भी गुरुनानक ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इसके तहत लोगों के बिच जाकर भगवान् की भक्ति के सही तरीके और महत्त्व का बखान किया। 


Guru Nanak short story Hindi (विश्व भ्रमण की कहानी) :

इतिहासकारों का कहना हैं की, गुरुनानक ने अपनी लगभग सभी यात्राएं पैदल ही तय की थी। 27 साल की उम्र में घर छोड़ देने के बाद, अगले 30 सालों तक इन्होंन सन्यासी की भाँती अपना जीवन व्यतीत किया। 

कहा जाता है की, 1496 के बाद ये तिब्बत, दक्षिण एशिया और अरेबिया तक की यात्रा के लिए निकल पड़े। जिसमें आम जनता तक अपना ज्ञान और उपदेश पहुँचाने के लिए, इन्होनें 5 यात्राएं (उदासिस) भी की। जिनका विवरण आगे दिया गया हैं। 


How Guru Nanak spreads his teachings? (गुरु नानक की 5 यात्राएं) :

पहली यात्रा : 7 सालों की इस यात्रा में (सन् 1500 से 1507 ई० तक) गुरुनानकदेव ने भारत और पाकिस्तान के अधिकतर हिस्सों का भ्रमण किया और लोगों के साथ अपना ज्ञान साझा किया। 

दूसरी यात्रा : अपनी दूसरी यात्रा में, 7 सालों तक (सन् 1507 से 1514 ई०), श्रीलंका के लोगों के लिए पथ-प्रदर्शक की भूमिका निभाई। 

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तीसरी यात्रा : सन् 1514 से 1519 तक, इन्होनें कश्मीर, नेपाल, ताशकंद, तिब्बत और सिक्किम की यात्रा की। इस दौरान, इन्हे हिमालय की दर्दनाक परिश्थितियों को सामना करना पड़ा। 

चौथी यात्रा : 3 वर्षीय इस यात्रा में, नानकदेवजी ने मक्का और मध्य पूर्वी देशो का भ्रमण किया। 

पांचवी यात्रा : अपने जीवन की आख़री ज्ञान यात्रा में, ये पंजाब लोट आए। २ साल की इस यात्रा मने इनके भाई “मर्दाना” ने इनका साथ दिया। 


Teaching of Guru Nanak Dev Ji (ज्ञान) : 

गुरु नानक देवजी के द्वारा दिए गए ज्ञान को हम निम्नलिखित 3 क्रियाओं की मदद से अर्जित कर सकते हैं –

१. वंद-चक्को : इसका अर्थ हैं की हमेशा अपना ज्ञान, धन, वस्तु आदि को दूसरों के साथ साझा करे। हमेशा ज़रूरतमंदों की मदद करने में तत्पर रहें।

२. किरत करो : कभी भी किसी के साथ छल करके पैसा न कमाएं। हमेशा ईमानदारी के पथ पर चलने का प्रयास करें। 

३. नाम जप : भगवान् का सुमिरण करते रहें और कुछ बुरी आदतें जैसे – क्रोध, लोभ, लगाव और अहंकार को ख़त्म करें। 


Guru Nanak Devji updesh in hindi (उपदेश) :

गुरुनानक कहते हैं की, संसार का हर मानव आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त कर सकता हैं। इसके लिए उसे किसी पुजारी की आवश्यकता नहीं रहती। केवल, सच्चे मन से की गई भक्ति ही इस का एक मात्र उपाय हैं। 

ये कहते हैं, जब भगवान् ने ही मनुष्य को बनाया हैं तो उसे हर दिन, बार-बार भगवान् का सुमिरण करना चाहिए। 

 

Guru Nanak Dev death (समाधी) : 

अपने अद्वितीय ज्ञान के कारण, ये हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोगों में प्रतिष्ठित थे। कई वर्षों तक अपने इस ज्ञान को पूरी दुनिया में फैलाने के बाद 70 वर्षीय “गुरु नानक देवजी” ने भाई लेहना (गुरु अंगददेवजी) को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया और 22 सितम्बर 1539 को करतारपुर में समाधी में लीन हो गए। 

FAQs on Guru Nanak Dev :

प्रश्न 1 : गुरु नानक जयंती को हिंदी में किस नाम से जाना जाता हैं?
उत्तर : “गुरु पूरब” 
प्रश्न 2 : 2021 में गुरु नानक जयंती की दिनांक को हैं?
उत्तर : 19 नवंबर 2021 

प्रश्न 3 : 3 दिनों तक गुरु नानक जी जिस नदी के पास रहे उसका नाम क्या था?
उत्तर : सुल्तानपुर की नदी। 
प्रश्न 4 : गुरु नानक देवजी की पत्नी माता सुलखनी देवी कहाँ की रहने वाली थी?
उत्तर : गुरदासपुर (पंजाब) 

Final words on Guru Nanak biography in Hindi (उपसंहार) :

साथियों, हमने अपने प्रयासों से आप तक Guru Nanak Dev Ji History in Hindi की जानकारी प्रदान की। यदि आपको ये जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें। 

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