Social Reformer Ishwar Chandra Vidyasagar Biography in Hindi, Paragraph, Jivani, Rachna, Contribution

नमस्कार दोस्तों, आज हम “ज्ञान का भंडार” कहे जाने वालेsocial reformer Ishwar Chandra Vidyasagar biography in Hindi” पढ़ने वाले है। अपने पूरे जीवन में समाज की बुराइयों को उजागर कर, उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जीवन परिचय बेहद ही अनुकरणीय हैं। 


इनके जीवन परिचय के अंतर्गत, ईश्वरचंद्र विद्यासागर की शिक्षा, परिवार, शुरवाती जीवन, सामाजिक और शैक्षिक योगदान, रचनाएँ, पूरोस्कार एवं सम्मान आदि के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई हैं। 
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Social Reformer Ishwar Chandra Vidyasagar Biography in Hindi (Images)

Quick introduction of Ishwar Chandra Vidyasagar in Hindi (मुख्य बिंदु) :

  • नाम – ईश्वरचंद्र विद्यासागर 
  • जन्मनाम – ईश्वरचंद्र बंदोपाध्याय 
  • जन्म – 26 सितम्बर 1820
  • स्थान – बीरसिंघा ग्राम : पश्चिम मिदनापुर (बंगाल) 
  • पिता – ठाकुरदास बंदोपाध्याय 
  • माता – भगवती देवी 
  • पत्नी – दिनमणि देवी 
  • पुत्र – नरायणचंद बंदोपाध्याय 
  • शिक्षा – संस्कृत, साहित्य, खगोलशास्त्र 
  • कार्यक्षेत्र – दार्शनिक, शिक्षक, लेखक, अनुवादक, इत्यादि 
  • उपाधि – विद्यासागर 
  • मृत्यु – 29 जुलाई 1891
  • उम्र – 70 

Ishwar Chandra Vidyasagar paragraph in Hindi (ईश्वरचंद्र का जीवन परिचय) :

समाज की कुप्रथाओं का विरोध कर, समाज सुधारक की भूमिका निभाने वाले “ईश्वरचंद्र विद्यासागर” का जन्म 26 सितम्बर 1820 को पश्चिम मिदनापुर स्थित, बीरसिंघा गाँव में एक बंगाली हिन्दू परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ठाकुरदास बंदोपाध्याय और माता का नाम भगवती देवी था। 
इनका जन्म नाम (real name) “ईश्वरचंद्र बंदोपाध्याय” था। लेकिन, संस्कृत पर अपनी मज़बूत पकड़ को दर्शाते हुए इन्होनें, एक संस्कृत शिक्षक के रूप में ख्याति प्राप्त की। जिस कारण इन्हें “विद्यासागर” की उपाधि से सम्मानित किया गया। 
पढाई के प्रति इनकी असीम लगन के कारण इन्होनें कई विषयों का गहन अध्ययन किया। लेकिन, साथ ही अपने परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए कई छोटे-छोटे काम भी किए। 
इन सभी उपलब्धियों के अलावा, ईश्वरचंद्र विद्यासागर के द्वारा किए गए सामाजिक व् शैक्षिक सुधारो के लिए इनका नाम इतिहास में अमर हो गया। इस तेजस्वी व्यक्तित्व के धनि से जुड़ी कई जानकारियाँ आगे विस्तार से दी गई हैं। 

Ishwarchandra family, father, wife, son, daughter (परिवार) :

पश्चिम मिदनापुर के बंगाली हिन्दू परिवार में जन्मे ईश्वरचंद्र विद्यासागर के पिता का नाम “ठाकुरदास बंदोपाध्याय” और माता का नाम “भगवती देवी” था।  इनका जन्म बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। 
दरिद्रता के चलते भी इन्होनें कभी भगवान् के प्रति अपनी श्रद्धा को काम नहीं होने दिया और हमेशा अपने धर्म के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखा। 
पुरानी मान्यताओं के कारण, महज़ 14 वर्ष की आयु में ईश्वरचंद्र विद्यासागर की शादी – दिनामणि देवी के साथ हो गया था। इनका शुरवाती वैवाहिक जीवन बेहद खुशहाल रहा और इन्हे एक पुत्र की भी प्राप्ति हुई जिसका नाम “नरायणचंद बंदोपाध्याय” रखा गया। 

Ishwar Chandra Vidyasagar education (शिक्षा) :

ईश्वरचंद बचपन से ही बहुत होशियार और शिक्षा के प्रति जागृप्त थे। इन्होनें हमेशा से लोगो को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। पैसों की कमी के चलते, बचपन में एक रोशनदान के अभाव में इन्होनें स्ट्रीट लाइट के निचे बैठ कर भी पढाई की। 
अनगिनत परेशानियों के बावजूद भी इन्होनें पढाई के प्रति अपनी लगन को कम नहीं होने दिया और कई विषयों पर महारथ हासिल की। 
ये हमेशा से भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदलना चाहते थे। इनका मानना था की शिक्षा के अभाव के कारण ही समाज में गरीबी और अनेक कुप्रथाओं का जन्म होता हैं। 
बचपन से ही ये विदेशी कॉलेज में पढ़ना चाहते थे। लेकिन, पैसों की कमी के कारण ये विदेश जाने में असफल रहे और साल 1829 में इन्होनें संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। 
अपनी अध्ययन के साथ-साथ, अपनी परिवार का आर्थिक समर्थन करने के लिए इन्होनें “जोरशांको” में एक शिक्षक की नौकरी भी की। 


Job and life stories (नौकरी एवं व्यवसाय) :

जल्द ही संस्कृत शिक्षा पूरी करने के बाद, ईश्वरचन्द्रजी ने वकालत की पढाई प्रारम्भ की और सन् 1839 में केवल 19 वर्ष की उम्र में अपनी वकालत की परीक्षा भी उत्तीर्ण करली।
 
इसके बाद इन्हें कई संसथान से अलग-अलग प्रस्ताव आने लगे। सन् 1841 में 21 वर्षीय विद्यासागर ने “Fort Williams college” के “संस्कृत विभाग प्रमुख” के पद को भी संभाला। 
लेकिन, सन् 1846 में इन्होनें अपना स्तीफा दे दिया और संस्कृत कॉलेज के सहायक सचिव के रूप में नियुक्त हुए। कुछ वर्षों के बाद ही इन्हें प्रधानाचार्य बनने का अवसर मिला। जिसके बाद अपनी शक्तियों का सही उपयोग करते हुए, ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने शिक्षा प्रणाली को बदलने के लिए कई कदम उठाए। 

Contribution to education / educational reform (शेक्षिक सुधार) :

इनके अद्वितीय ज्ञान के कारण इन्हें भारतीय शिक्षा प्रणाली का निरीक्षक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान इन्होनें विद्यालयों की ख़राब हालत और महिला शिक्षा के अभाव पर दुःख जताया। 
उस समय कोई भी परिवार अपनी लड़कियों को स्कूल नहीं भेजता था। इस कुप्रथा को तोड़ने के लिए ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने 35 महिला विद्यालयों की शुरवात की। और घर घर जाकर लोगों को महिला शिक्षा के लिए जागृप्त किया। 

Contribution to society / social reform (सामाजिक सुधार) :

ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने केवल शैक्षिक सुधार ही नहीं किया। बल्कि कई सामाजिक कुप्रथाओं को भी ख़त्म किया। इनका सबसे बड़ा कदम “विधवा विवाह” को माना जाता हैं। 
उस समय लड़कियों की बहुत छोटी उम्र में शादी करदी जाती थी और अगर वे विधवा हो जाये तो उनके साथ अच्छा व्यव्हार नहीं किया जाता था। और नाहीं उन्हें दूसरी शादी के लिए अनुमति दी जाती थी। 
विद्यासागरजी ने इस कुप्रथा को तोड़ने के लिए एक याचिका पर 25,000 लोगों के हस्ताक्षर कराए और अदालत में अपनी अर्ज़ी पेश की। लेकिन, ब्रिटिश सर्कार ने इसे रद्द कर दिया। 
इसके बावजूद भी विद्यासागर के अथक प्रयासों और सरकारी अफसरों से कई वाद-विवाद करने के बाद 26 जुलाई 1856 को “विधवा पुनर्विवाह अधिनियम” पारित हुआ और एक सामाजिक कुप्रथा का अंत हुआ। 

About ishwar chandra vidyasagar death (मृत्यु) :

अपने जीवन के आखरी 20 सालों में ईश्वरचंद्र विद्यासागर का अपनी पत्नी से मतभेद हुआ और दोनों अलग हो गए। जिसके बाद ये झारखण्ड राज्य के जामतारा जिले में स्थित “कर्माता” नामक जगह पर रहने लगे। 
समय के साथ, इनका स्वस्थ भी बिगड़ता चला गया और 29 जुलाई 1891 को 70 वर्ष की आयु में ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मृत्यु हो गई। 

Awards and achievements (पुरस्कार एवं सम्मान) :

  • संस्कृत विद्यालय में एक बेहतरीन संस्कृत शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाने पर ईश्वरचंद्रजी को “विद्यासागर” की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 
  • बचपन से ही इन्होनें हर परीक्षा में सफलता अर्जित की और इनके प्रदर्शन के कारण इन्हें कई स्कॉलरशिप्स भी जीतने का मौका मिला। 
  • इनकी मृत्यु के बाद, इनकी स्मृति में “कमाता रेलवे स्टेशन” का नाम बदलकर “विद्यासागर रेलवे स्टेशन” रख दिया गया। 

List of all books of Ishwar Chandra Vidyasagar (रचना) :

समाज में जागरूकता फैलाने के लिए इन्होनें कई लेख और किताबे लिखी। इनकी कुछ प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं :
  1. बेताल पांचबिंसति (सन् 1847)
  2. बंगला-र इतिहास (सन् 1848)
  3. जीबनचरित (सन् 1850)
  4. बोधादोय (सन् 1851)
  5. उपक्रमणिका (सन् 1851)
  6. बिधबा बिबाह बिषयक प्रस्ताब 
  7. बोर्नो परिचय (सन् 1854)
  8. कोठा माला (सन् 1856)
  9. सितार बोनोबोस (सन् 1860)

04 FAQs on Ishwar Chandra Vidyasagar :

Q1. ईश्वरचंद्र विद्यासागर द्वारा कौन – कौन से स्कूल की स्थापना की गई?
Ans : समाज सुधर के लिए इन्हें 20 मॉडल स्कूल और 35 महिला विद्यालयों की भी स्थापना की जिसमें 1300 से ज्यादा विद्यार्थियों ने शिक्षा ली। 
Q2. why Ishwar Chandra Vidyasagar wrote his name Ishwar Chandra Sharma instead of Bandyopadhyay?
Ans : संस्कृत में मज़बूत पकड़ होने के कारण ईश्वर चंद्र बंदोपाध्याय को “विद्यासागर” की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 
Q3. ईश्वरचंद्र विद्यासागर की शादी कब हुई?
उत्तर : महज़ 14 साल की उम्र में सन् 1834 में विद्यासागरजी क दिनमणि देवी के साथ हुई। 
Q4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने कोनसी प्रथाओं को ख़त्म किया?
उत्तर : इन्होंने कई सामाजिक कुप्रथाओं का खत्म किया और नारी शिक्षा और विधवा विवाह की शुरवात की। 

Final words on Ishwarchandra Vidyasagar jivani / Jeevan Kahani : 

तो दोस्तों, हमने बहुत ही सरल और स्पष्ट भाषा में biography of Ishwar chandra Vidyasagar in Hindi बताने का प्रयास किया। इस लेख में Social Reformer Ishwar Chandra Vidyasagar Biography in Hindi, Paragraph, jivani, rachna, contribution, educational reform, social reform, life stories, death आदि के बारे में भी संक्षिप्त में जानकारी प्रदान की। 
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