Junko Tabei biography in Hindi, Age, Height, Wiki, Everest Story, Parents, Childrens

Who was the first woman to climb mount everest? क्या आपके मन में भी ये सवाल हैं? तो अब हम आपको इस सवाल का विस्तृत उत्तर देने का प्रयास करेंगे।  नमस्कार दोस्तों, आज हम विश्व की सबसे पहली महिला एवेरेस्ट पर्वतारोही “Junko Tabei biography in Hindi” पढ़ने वाले हैं। 

इस लेख में जुंको ताबेई के जीवन के सभी जानकरी जैसे – इनका शुरवाती जीवन, शिक्षा, परिवार, एवेरेस्ट यात्रा आदि की जानकारी प्रदान की गई हैं। 

Junko Tabei biography in Hindi, Age, Height, Wiki, Everest Story, Parents, Childrens


Short introduction of Junko Tabei (संक्षिप्त परिचय) :

  • नाम – जुंको ताबेई
  • जन्म – 22 सितम्बर 1939 
  • स्थान – मिहरु (फुकुशिमा, जापान) 
  • पति – मासानोबू ताबेई 
  • पुत्र – शिन्या 
  • पुत्री – नोरिको 
  • उपलब्धि – पहली महिला एवेरेस्ट पर्वतारोही
  • लम्बाई – 4’9″
  • मृत्यु – 20 अक्टूबर 2016 
  • उम्र – 77 वर्ष 

Biography of Junko Tabei in HIndi (जुंको ताबेई का जीवन परिचय) :

विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत “माउंट एवेरेस्ट” पर चढ़ाई करने वाली पहली महिला पर्वतारोही जुंको ताबेई का जन्म 22 सितम्बर 1939 को जापान के फुकुशिमा स्थित मिहरु नगर में हुआ था। इनके पिता एक advertising कंपनी में hoardings प्रिंट करने का काम किया करते थे। 
इनके माता-पिता की कुल 7 संतानें थी, जिसमें जुंको ताबेई 5वि संतान थी। बचपन से ही पढाई में कमजोर जुंको को पहाड़ों की चढ़ाई करना बेहद पसंद था। 
जब इन्होनें सबको अपने एवेरेस्ट चढ़ने के लक्ष्य के बारे में बताया तो सब ने इनका मज़ाक उड़ाया। लेकिन, इन्होनें कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर रही और 16 मई 1975 को इन्होनें एवेरेस्ट फतह कर सबको अचंभित कर दिया। 

Early life of Junko Tabei in Hindi (जुंको का बचपन) :

जब जुंको का जन्म हुआ था तब जापान एक पुरूष प्रधान समाज के रूप में माना जाता था। जिसमें महिलाओं को घर से निकलने की अनुमति नहीं थी और महिला शिक्षा पर भी ज़ोर नहीं दिया जाता था।
लेकिन, इनके परिवार ने समाज के विरूद्ध जाकर भी शिक्षा पर ज़ोर दिया और बढ़ी कठिनाइयों के बाद भी जुंको की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। 
बचपन से ही निमोनिया, बुखार आदि बिमारियों से ग्रसित होने के कारन ये बहुत कमज़ोर थी। साथ ही पढाई में भी इनकी कोई ख़ास रूचि नहीं थी। 

Junko Tabei education (शिक्षा) :

इन सभी परेशानियों के बावजूद भी इनके माता-पिता ने इन्हें माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाया और उच्च शिक्षा के लिए टोक्यो यूनिवर्सिटी में भेजा। लेकिन, यहाँ के छात्रों ने जुंको की बोली का बहुत मज़ाक उड़ाया। जिस कारन ये तनाव में चली गई तब इनके पिता ने इनका मार्गदर्शन किया। 
इसके बाद सन् 1958 से 1962 तक इन्होनें “Showa women university” से अंग्रेजी साहित्य की शिक्षा ली। यही से इनके एक सफल पर्वतारोही बनने की भी शुरवात हुई। 


Family, father, husband, son, daughter (जुनको का परिवार):

जुंको ताबेई के माता-पिता के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन, इनके पति और बच्चों के बारे में हम आपको संक्षिप्त में बताते हैं। 
जुंको के पति का नाम “मासानोबू ताबेई” था , ये भी एक प्रख्यात पर्वतारोही रह चुके हैं। इन्होनें अपने पत्नी के सपनो को पूरा करने में बहुत महनत की और उन्हें हर प्रकार से समर्थन भी किया। 
जुंको और मासानोबू के 2 बच्चे भी हुए, इनके बेटे का नाम “शिन्या ताबेई” हैं और इनकी बेटी का नाम “नोरिको” हैं। जब जुंको एवेरेस्ट पर चढ़ाई कर रही थी तब उनकी बेटी की उम्र केवल 3 साल थी। 

How Junko became mountaneer? (कैसे बनी पर्वतारोही) :

बचपन में स्कूल ट्रिप के दौरान, इन्हें “माउंट नासु” पर चढ़ाई करने का मौका मिला। यही से पर्वतारोहण में इनकी रूचि बढ़ी और इन्होनें एक पर्वतारोही बनने की इच्छा जताई। लेकिन, इनके परिवार वालो ने उस समय इनकी इस इच्छा को नाकार दिया और केवल पढाई पर ध्यान देने की नसीहत दी। 
“Showa women university”  अध्ययन के दौरान इन्हे एक पर्वतारोहियों के छोटे समूह में शामिल किया गया। लेकिन, ये एक सफल पर्वतारोही बनने के लिए किसी बड़े समूह के साथ जुड़ना चाहती थी। 
तब इन्होनें कई समुहों में शामिल होने की कोशिश की। लेकिन, लड़की होने के कारन सब ने मज़ाक उड़ाया और शामिल करने से मन कर दिया। 

Motivational story (जुंको की कहानी) :

इस अपमान के कारण सन् 1969 में जुंको ने कई महिलाओं के साथ मिलकर “Ladies climbing club Japan” की स्थापना की। इस क्लब में ज्यादातर ग्रहणियां ही थी। 
सुरवात में इस पूरे समूह ने मिल कर “माउंट फुजि” (जापान), “माटरहॉर्न” (स्विस ऐल्प्स) आदि पर्वतो की सफल चढ़ाई की। सन् 1972 तक जुंको ताबेई जापान की मशहूर पर्वतारोही बन चुकी थी। 
इस स्तर तक पहुँचने के बाद, ताबेई ने निर्णय लिया की अब वे जापान के बहार जाकर, अन्य देशों के सबसे ऊँचे पर्वतो की चढ़ाई करेगी और साथ ही विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत “माउंट एवेरेस्ट” पर भी अपना परचम लहराईगी। 

When did Junko Tabei climb mount everest (एवेरेस्ट यात्रा) :

एवेरेस्ट फतह करने का मन बना चुकी जुंको ने वर्ष 1970 में नेपाल सरकार से अनुमति मांगी। लेकिन, उन्हें निराशा हाथ लगी। तब हार ना मानकर इन्होने बार-बार अर्ज़ियाँ दी। 
तब 1972 में नेपाल की सरकार ने इन्हें तीन साल बाद यानि 1975 में एवेरेस्ट पर जाने की अनुमति देदी। तब 15 पर्वतारोहियों के समूह, जिसमे 13 महिलाऐं और केवल 2 पुरूष के साथ ट्रेनिंग की शुरवात की। 
लेकिन, ये जानती थी की ट्रेनिंग के साथ-साथ इन्हे एक प्रायोजक (sponsor) की भी ज़रूरत होगी। जो इन्हें इस यात्रा के दौरान होने वाले खर्चो में मदद कर सके। 


How Tabei raised funding? :

जुंको ने कई प्रायोजकों से संपर्क किया और अपनी योजना बताई लेकिन, किसी ने भी उन्हें मदद नहीं की। काफी कोशिशों के बाद एक अख़बार कंपनी ने इन्हे फण्ड देने का निर्णय लिया। 
लेकिन, इतने पैसे भी पार्यप्त नहीं थे। तब, जुंको ने सभी सदस्यों से अपनी जमा-पूंजी इस यात्रा में लगाने के लिए आग्रह किया। 
इस सफर को शुरू करने से पहले सभी जरुरत के उपकरणों को इन्होनें खुद से बनाने का प्रयास किया और कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उपयोग किया जो पहले किसी और के द्वारा इस्तेमाल की जा चुकी थी। इनका उद्देश्य कम से कम खर्चे में अपनी यात्रा को सफलतापूर्वक पूरी करने का था। 

Everest journey (कब शुरू की चढ़ाई?) :

एवेरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए सबसे सही समय, मार्च से मई महीने के बिच होता हैं। इसलिए मार्च 1975 में जुंको ताबेई अपने पूरे समूह के साथ काठमांडू पहुंची और चढ़ाई प्रारम्भ की। 
इन्होने अलग-अलग ऊंचाइयों पर basecamps बनाए। सबसे पहला basecamp कुंभु फॉल पर बनाया गया और तहिद और ऊंचाई पर 2 और basecamps बनाए गए। 
एक रात जब सभी लोग, 6300 मीटर ऊंचाई पर बने एक basecamp में सो रहे थे। तभी हिमस्खलन (avalanche) हुआ और कई लोग बर्फ में दब गए। 
इस घटना में जुंको भी बर्फ के अंदर दब गई थी। तब शेरपा ने बड़ी मुश्किल से सभी बर्फ को हटाया और जुंको को सुरक्षित बहार निकला। 

Junko Tabei resolution (जुंको का संकल्प) :

वर्ष 1970 में एक जापानी समूह एवेरेस्ट की चढ़ाई कर चूका था। लेकिन, उस सफर के दौरान कुछ लोगो की मृत्यु हो गई थी। 
इस घटना से आहात होकर, जुंको ने यह निर्णय लिया की वे अपने साथ के सभी लोगो के साथ एवेरेस्ट फ़तेह करेगी और सभी को सुरक्षित जापान भी लेकर जाएगी। 

First women to climb Mount Everest (सफलता की कहानी) :

जब सभी लोग एवेरेस्ट की चोटी के बेहत करीब थे, तब ऑक्सीजन और खाना ख़तम होने लगा। केवल इतनी ही ऑक्सीजन बची थी जिससे केवल एक व्यक्ति ही बचे हुए 6 घंटे का सफर तय कर सकता था। 
तब सभी सदस्यों ने जुंको से आग्रह किया की वह चढ़ाई जारी रखे और वे सब basecamp में उसका इंतज़ार करेंगे। इस पूरी घटना से जुंको बहुत प्रभावित हुई और अपना सफर जारी रखा। 
बेहद विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए, अपने शेरपा “एंग सेरिंग (Ang Tsering)” की सहायता से 16 मई 1975 को दोपहर 12:30 बजे जुंको ने एवेरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। इसके बाद जापान सरक़ार, नेपाल सरकार और वर्ल्ड मीडिया ने जुंको की बेहद सराहना की। 

Achievements and records (उपलब्धियां) :

एवेरेस्ट फतह करने के बाद भी जुंको ने अपना काम जारी रखा और विश्व के कई और पर्वतों की चढ़ाई की जिनकी जानकरी निम्नलिखित हैं – 
  • वर्ष 1990 – 1991 : इस दौरान इन्होनें अंटार्टिका के सबसे उच्चे पर्वत “माउंट विंसन” की सफलतापूर्वक चढ़ाई की। 
  • वर्ष 1992 : इस वर्ष 28 जून 1992 को इन्होनें इंडोनेशिया के सबसे ऊँचे पर्वत “पुचक जायें पर्वत” की चढ़ाई की। 
  • इस तरह से अलग-अलग पहाड़ों को फतह करते हुए ये विश्व की पहली महिला बानी जिसने विश्व के 7 महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों पर अपनी सफलता का परचम लहराया। 
  • तत्पश्चात इन्हे “Himalaya Adventure trust, Japan” का निर्देशक बनाया गया ,इस संसथान का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पहाड़ों के प्राकृतिक संरक्षण को बनाये रखना हैं। 

Junko Tabei death age (मृत्यु) :

वर्ष 2012 में इनका कैंसर डिग्नोसिस हुआ तभी से इनका स्वास्थ बिगड़ने लगा। अपने पूरे जीवन काल में जुंको ने 76 देशों के सबसे ऊँचे पहाड़ो की चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया। 
निरंतर ख़राब स्वास्थ के चलते 77 वर्षीय जुंको ताबेई की 20 अक्टूबर 2016 को Kawagoe के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई। 

Final words on Junko Tabei biography in Hindi:

2016 में दुनिया को अलविदा कह गई जुंको के जीवन परिचय से हमें, कभी हार ना मानकर – लगातार डटे रहने की सिख मिलती हैं। यदि आपको भी यह जिवनी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें। 

धन्यवाद!!

Leave a Comment