9 साल की बालवधु – Mahadevi Verma Biography in Hindi | महादेवी वर्मा जीवनी – जीवन परिचय हिंदी में

Mahadevi Verma Biography in Hindi : दोस्तों, जब भी हम प्रतष्ठित हिंदी साहित्यकारों के बारे में पड़ते हे, तो हमारे दिमाग में प्रेमचंद, “रामचंद्र शुक्ल”, “तुलसीदास”, “भारतेन्दु हरिश्चंद्र” आदि के नाम सबसे पहले आते हे। 

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला साहित्यकार की जीवनी बताने जा रहे है, जिसने अपनी रचनाओं से सम्पूर्ण साहित्य जगत में क्रांति लाने का काम किया। तो हम बात कर रहे हे “Mahadevi Verma Biography in Hindi” की। 

इनकी जीवनी को विस्तार में पढ़ने से पूर्व, आप महादेवी वर्मा की बायोग्राफी को संक्षेप में समझिये।

9 साल की बालवधु - Mahadevi Verma Biography in Hindi | महादेवी वर्मा जीवनी - जीवन परिचय हिंदी में
Mahadevi Verma Biography & Images

Mahadevi Verma biography in Hindi (संक्षिप्त जीवनी) :

  • नाम – महादेवी वर्मा 
  • जन्म तिथि – 26 मार्च 1907 
  • पिता का नाम – गोविन्द प्रसाद वर्मा 
  • माता का नाम – हेमरानी देवी 
  • पति – स्वरुप नारायण वर्मा 
  • पुरस्कार – पद्म भूषण, मंगला प्रसाद पारितोषित 
  • प्रमुख रचनाएँ – रश्मि, नीरजा 
  • मृत्यु तिथि – 11 सितम्बर 1987 
  • पति का नाम – स्वरुप नारायण वर्मा 
  • उपनाम – आधुनिक मीरा 


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Mahadevi Verma ka jeevan parichay (जीवन परिचय) :

“आधुनिक युग की मीरा” के नाम से प्रसिद्ध महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ। इनके पिता “गोविन्द प्रसाद वर्मा”, भागलपुर स्थित एक विश्वविद्याल में शिक्षक थे। इनकी माताजी “हेमरानी देवी” एक कर्म-निष्ठ, धर्म-परायण महिला होने के साथ ही एक “हिंदी विदुषी” भी थी। महादेवी जी को तुलसीदास, मीरा, और सूरदास की रचनाओं का ज्ञान अपनी माता से ही प्राप्त हुआ।
इनकी माताजी को रामायण, गीता और विनय पत्रिका पढ़ना काफी रुचिकर लगता था। एक धर्म-परायण महिला की तरह वह अपने दिन के कई घंटे परमेश्वर की आराधना में लगा देति थी।
महादेवी जी के द्वारा कई बाल कविताओं, गद्य, निबंध, कविता संग्रहो की रचना की गई। बचपन से ही इन्हे साहित्य में काफी रूचि थी और इसी रूचि के कारन इन्हे अपने रचनाओं के लिए कई उपाधि और पुरस्कारो से सम्मानित भी किया गया।

11 FAQs on Mahadevi Verma :

प्रश्न 1 : महादेवी वर्मा द्वारा रचित “मेरा परिवार” के सभी जानवर और पक्षी (पात्रों) के नाम बताइये?
उत्तर : मेरा परिवार में महादेवीजी ने निम्नलिखित पशुओं और पक्षियों के बारे में चर्चा की हैं – 
  • नीलकंठ (मोर)
  • गिल्लू (गिलहरी)
  • सोना (हिरण)
  • दुर्मुख (खरगोश)
  • गौरा (गाय)
  • नीलू (कुत्ता)
  • निक्की (नेवला)
  • रोज़ी (कुतिया)
  • रानी (घोड़ा)
प्रश्न 2 : महादेवी वर्मा को लिखना किसने सिखाया?
उत्तर : मैथिलि शरण गुप्त।
प्रश्न 3 : महादेवी वर्मा की मृत्यु का कारण क्या था?
उत्तर : ख़राब स्वस्थ के चलते, 80 वर्ष की आयु में 11 सितम्बर 1987 को महादेवीजी की मृत्यु हो गई।
प्रश्न 4 : ज्ञानपीठ पुरस्कार से किसे सम्मानित किया गया?
उत्तर: महादेवी वर्मा।
प्रश्न 5 : महादेवी वर्मा की माँ कहाँ की थी?
उत्तर: उत्तरप्रदेश। 

प्रश्न 6 : महादेवी वर्मा की मृत्यु कहाँ हुई थी?
उत्तर : उत्तरप्रदेश में। 
प्रश्न 7 : महादेवी वर्मा के पास कौन – कौन से जानवर रहते थे?
उत्तर : मोर, बिल्ली, कुत्ता, खरगोश, घोड़ा, कुतिया, नेवला, हिरण, गिलहरी, गाय आदि। 
प्रश्न 8 : महादेवी जी ने ब्रजभाषा के बाद किस भाषा में कविता लिखना प्रारंभ किया था?
उत्तर: खड़ी बोली। 
प्रश्न 9 : महादेवी की अभिभाविका कौन थी?
उत्तर: हेमरानी देवी। 
प्रश्न 10 : महादेवी वर्मा का जन्मस्थान क्या हैं और इनके मातापिता का नाम क्या हे ?
उत्तर : 
  • जन्मस्थान – फर्रुखाबाद 
  • पिता का नाम – गोविन्द प्रसाद वर्मा 
  • माता का नाम – हेमरानी देवी 

प्रश्न 11 : महादेवीजी के पति की मृत्यु कौन से सन् में हुई थी?
उत्तर : सन् 1966 में। 

Hindi Poetess Mahadevi Verma education (महादेवी वर्मा की शिक्षा) :

महादेवी वर्मा जी की माँ ने बचपन से इन्हे साहित्य से जुड़ी जानकारी प्रदान की, जिससे महादेवी जी की रूचि साहित्य में प्रबल होती चली गई। सिर्फ 7 वर्ष की आयु में ही इन्होने कविता लिखनी प्रारम्भ करदी थी।
साल 1925 में जब ये कक्षा 10वी में आई, तब तक एक कवयित्री के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी थी। शुरवात में इन्होने अपनी कई कविता ब्रज भाषा में लिखी। लेकिन, जब इन्होने मैथिलि शरण गुप्त की खड़ी बोली में लिखी कविताओं को पढ़ा, तो अपनी कविताओं को भी खड़ी बोली में लिखने का निर्णय लिया।
अपनी भाव-विभोर कर देने वाली रचनाओं के कारन, ये “छायावाद” की प्रमुख कवयित्री बनी। साल 1933 में इन्होने अपनी एम्० ए० (M.A. – Master of Arts) की पढाई पूरी की। उसी वर्ष ये “प्रयाग महिला विद्यापीठ” की प्रधानाचार्या के पद पर नियुक्त हुई।

Mahadevi Verma ki rachnaye (महादेवी वर्मा की साहित्यिक रचनाएँ) :

वैसे तो महादेवी जी ने कई विषयो पर अपनी लेखनी चलाई, लेकिन उनके कुछ निबंध, कविता संग्रह, गद्य रचनाएं, बाल कविताएं बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हे। तो चलिए, अब इनकी रचनाओं और संग्रहों के बारे में थोड़ा विस्तार में पढ़ते हे – 
गद्य रचनाएँ : इसमें प्रमुख हे रेखाचित्र और संस्मरण :

रेखाचित्र  2 प्रमुख रेखाचित्र हे :
  • अतीत के छल्ले –  इसकी रचना 1941 में हुई।
  • स्मृति की रेखाएं – इसकी रचना 1943 में हुई। 


संस्मरण  2 प्रमुख संस्मरण हे :

  • पथ के साथी – वर्ष 1956 में रचना हुई।
  • मेरा परिवार –  वर्ष 1972 में रचना हुई।
निबंध रचनाएं – प्रसिद्ध निबंध निम्नलिखित हे :
  • श्रंखला की कड़िया – साल :1942 
  • साहित्यकार की आस्था – साल :1962 
  • संकल्पिता – साल :1969 

Poem of Mahadevi Verma (महादेवी वर्मा की कविता) :


बाल कविताएं – इनकी 2 प्रमुख रचनाएँ हे :
  • ठाकुर जी भोले हे।
  • आज खरीदेंगे हम ज्वाला। 

कविता संग्रह : इन्होने निम्नलिखित कविताओं में अपनी साहित्यिक कला का अनूठा प्रदर्शन किया :

  • निहार –  रचना वर्ष (1930)
  • रश्मि – वर्ष (1932)
  • नीरजा – रचना वर्ष (1934) 
  • सांध्यगीत – वर्ष (1936) 
  • दीपशिखा – रचना वर्ष (1942) 
  • सप्तवारदा – वर्ष (1959) 
  • प्रथम आयाम – रचना वर्ष (1974) 
  • अग्निरेखा – वर्ष (1980) 

Mahadevi Verma husband (महादेवी वर्मा का वैवाहिक जीवन) :

साहित्य को अपना जीवन समर्पित करने वाली महादेवीजी, विवाह नहीं करना चाहती थी। लेकिन साल 1916 में इनकी इच्छा के विरुद्ध, स्वरुप नारायण वर्मा से इनका विवाह हो गया। स्वरुप नारायण जी उस समय 10वी कक्षा के विद्यार्थी थे।
स्वरुप नारायण वर्मा, बरैली के पास नवाब गंज कसबे में रहते थे। महादेवीजी एक सन्यास्नी की भाँति अपना जीवन व्यतीत करना चाहती थी। इसलिए, वह अपने विवाह से खुश नहीं थी।

Story of Mahadevi Verma in Hindi (महादेवी वर्मा की कहानी) :

वर्ष 1966 में इनके पति के परलोक सिधारने के बाद ये अलाहबाद में रहने लगी। यहाँ, क्रोस्थ्वैट विश्वविद्यालय  में इनका परिचय सुप्रसिद्ध कवयित्री “सुभद्रा कुमारी चौहान” से हुआ।
समय बीतने के साथ ही दोनों की मित्रता काफी गहरी होती गई। सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी सखियों से, महादेवी जी का परिचय एक कवयित्री के रूप में कराया था। जिस कारन उन्हें क्रोस्थ्वैट विश्वविद्यालय में सब कवियित्री ही मानते थे।

Mahadevi Verma Awards and Achievements (पुरस्कार एवं उपलब्धियां) :

अपनी रचनाओं से पाठको को मंत्र – मुग्ध करने के कारण, इन्हे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
  • 1934 – अपनी प्रसिद्ध कविता “नीरजा” के लिए इन्हे, “सेक्सरिया” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 1943 – इस वर्ष इन्हे, “मंगला प्रसाद पारितोषित” और “भारत भार्ती” पुरस्कार दिया गया।
  • 1956 – साहित्य के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए इन्हे, भारत सरकार ने “पद्मा भूषण” से सम्मानित किया।
  • 1979 – महादेवी वर्मा पहली महिला बनी, जिसे “साहित्य अकादमी” की सदस्यता प्राप्त हुई।
  • 1982 – 27 अप्रैल 1982 में अपने संस्मरण “यामा” के लिए इन्हे, साहित्यिक क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान “ज्ञान पीठ पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।
  • 1988 – इनके मरणोपरांत (मृत्यु के बाद), भारत सरकार द्वारा “पद्मविभूषण” दिया गया। 
  • निर्माता “मृणाल सेन” ने, महादेवी जी के लिखे संस्मरण “चीनी भाई” पर बांग्ला में फिल्म बनाई। 


Mahadevi Verma ka sahityik parichay in hindi (साहित्यिक विशेषताए) :

अपनी लिखने की कला से इन्होने, कई साहित्यिक रचनाओं को विशेषताएं और नयापन प्रदान किया। इन्होने अपनी कविताओं को ब्रज भाषा की मधुरता और कोमलता प्रदान की। पाठको की रूचि को बनाये रखने के लिए, इन्होने छंदो को गीतों में रूपांतरित किया।
भाषा, साहित्य और दर्शन, इन् तीनो क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान देते हुए इन्होंने, आने वाली पीढ़ि के पाठको को भी प्रभावित किया। इनकी रचनाओं में सरलता के साथ – साथ, आत्म – चित्रण (imagination) का भाव भी हे।
एक रचनाकार, काव्य रूपों का सहारे लिए बिना, गद्य में कितना कुछ अर्पित कर सकता हे, यह सब हमे महादेवीवर्मा की रचनाओं से ही ज्ञात होता हे।
अपनी भावात्मक और गहन अनुभूति वाली रचनाओं के कारन ही महादेवी वर्मा एक सफल और प्रतिष्ठित कवयित्री बनी।

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Unknown facts (रोचक तथ्य) :

  1. इस आधुनिक हिंदी की सशक्त कवयित्री को “आधुनिक मीरा” के नाम से भी जाना जाता हैं।
  2. अपनी कविताओं में इन्होने, निम्न वर्ग, समाज सुधारक और महिला सशक्तिकरन पर ज्यादा जोर दिया।
  3. 7 साल की आयु से ही, इन्होने कविता लिखना प्रारम्भ कर दिया था।
  4. इन्होने अपने पुरे जीवन में “श्वेत – वस्त्र” ही धारण किये और कभी भी आयना नहीं देखा।
  5. अपनी रचनाओं से इन्होने हमेशा हिंदी के प्रचार – प्रसार का काम किया।
  6. कवि “निराला” के द्वारा इन्हे “हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती” भी कहा गया।

Final words oMahadevi Verma biography in Hindi (मेरा पक्ष) :

साथियो, आज हमने आप को mahadevi verma ka jeevan parichay से अवगत कराया। इनकी जीवनी वास्तव में प्रेरणा दायक और साहित्य प्रेमियों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। 
Hindi poetess Mahadevi Verma Biography in Hindi के साथ – साथ हमने mahadevi verma husband, information, hindi poems, stories, rachnaye, awards and achievements, unknown facts आदि के बारे में भी जानकारी प्रदान की। 
यदि हमसे उपयुक्त जानकारी के अलावा  कोई जानकारी अछूती रह गयी हो, तो हमे comments में ज़रूर बताये। 

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