50 Rs Salary man – Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi – लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय

About Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi : नमस्कार मित्रों, आज हम आपको एक ऐसे तेजस्वी व्यकित की जीवनी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यह सिद्ध कर दिया की जीवन में आपका पहनावा, बोली, धन – संपत्ति और सुंदरता ही आपको समाज में मान – सम्मान नहीं दिलाती। बल्कि, आपके द्वारा किये गए अच्छे काम और … Read more

About Sumitranandan Pant Biography in Hindi | (बुढ़ा चाँद के लेखक) सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय

About Sumitranandan Pant in Hindi : नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “छायावाद के विष्णु” नाम से प्रसिद्द “Sumitranandan Pant Bioraphy in Hindi “ बताने जा रहे हैं। पंतजी के जीवन को विस्तार से समझने से पूर्व, हम उनके जीवन परिचय की मुख्य बिंदु जैसे – जन्म स्थान, माता-पिता, मुख्य रचनाए, शिक्षा, उपाधि और सम्मान, आदि को … Read more

विधवा के लेखक – Suryakant Tripathi Nirala Biography in Hindi | सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय

“छायावाद के महेश” नाम से प्रसिद्द “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय” बहुत प्रेरणादायक हैं। अगर आप भी साहित्य के क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हे तो, आपको “Suryakant Tripathi Nirala biography in hindi” को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। इनके जीवन से जुड़ी कई बिंदुओं को हम आगे विस्तार से पढ़ेंगे, जैसे – इनकी रचनाएं, साहित्यिक विशेषताएं, … Read more

बाल विधवा के पति मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय | Short Biography of Munshi Premchand in Hindi

Short Biography (jeevan parichay) of Munshi Premchand in Hindi : नमस्कार मित्रों, आज हम “मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय” की चर्चा करने वाले हैं। एक सफल साहित्यकार, कवि, उपन्यासकार के  रूप में इतिहास में अपना नाम अमर कराने वाले, “मुंशी प्रेमचंद” की  शिक्षा-दिक्षा, रचनाओं, उपन्यास, कविताओं के बारे में हम आपको विस्तार से जानकारी देने का प्रयास करेंगे। Munshi … Read more

9 साल की बालवधु – Mahadevi Verma Biography in Hindi | महादेवी वर्मा जीवनी – जीवन परिचय हिंदी में

Mahadevi Verma Biography in Hindi : दोस्तों, जब भी हम प्रतष्ठित हिंदी साहित्यकारों के बारे में पड़ते हे, तो हमारे दिमाग में प्रेमचंद, “रामचंद्र शुक्ल”, “तुलसीदास”, “भारतेन्दु हरिश्चंद्र” आदि के नाम सबसे पहले आते हे। 

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला साहित्यकार की जीवनी बताने जा रहे है, जिसने अपनी रचनाओं से सम्पूर्ण साहित्य जगत में क्रांति लाने का काम किया। तो हम बात कर रहे हे “Mahadevi Verma Biography in Hindi” की। 

इनकी जीवनी को विस्तार में पढ़ने से पूर्व, आप महादेवी वर्मा की बायोग्राफी को संक्षेप में समझिये।

9 साल की बालवधु - Mahadevi Verma Biography in Hindi | महादेवी वर्मा जीवनी - जीवन परिचय हिंदी में
Mahadevi Verma Biography & Images

Mahadevi Verma biography in Hindi (संक्षिप्त जीवनी) :

  • नाम – महादेवी वर्मा 
  • जन्म तिथि – 26 मार्च 1907 
  • पिता का नाम – गोविन्द प्रसाद वर्मा 
  • माता का नाम – हेमरानी देवी 
  • पति – स्वरुप नारायण वर्मा 
  • पुरस्कार – पद्म भूषण, मंगला प्रसाद पारितोषित 
  • प्रमुख रचनाएँ – रश्मि, नीरजा 
  • मृत्यु तिथि – 11 सितम्बर 1987 
  • पति का नाम – स्वरुप नारायण वर्मा 
  • उपनाम – आधुनिक मीरा 


ज़रूर पढ़े – Ramdhari Singh DINKAR Biography in Hindi 

Mahadevi Verma ka jeevan parichay (जीवन परिचय) :

“आधुनिक युग की मीरा” के नाम से प्रसिद्ध महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ। इनके पिता “गोविन्द प्रसाद वर्मा”, भागलपुर स्थित एक विश्वविद्याल में शिक्षक थे। इनकी माताजी “हेमरानी देवी” एक कर्म-निष्ठ, धर्म-परायण महिला होने के साथ ही एक “हिंदी विदुषी” भी थी। महादेवी जी को तुलसीदास, मीरा, और सूरदास की रचनाओं का ज्ञान अपनी माता से ही प्राप्त हुआ।
इनकी माताजी को रामायण, गीता और विनय पत्रिका पढ़ना काफी रुचिकर लगता था। एक धर्म-परायण महिला की तरह वह अपने दिन के कई घंटे परमेश्वर की आराधना में लगा देति थी।
महादेवी जी के द्वारा कई बाल कविताओं, गद्य, निबंध, कविता संग्रहो की रचना की गई। बचपन से ही इन्हे साहित्य में काफी रूचि थी और इसी रूचि के कारन इन्हे अपने रचनाओं के लिए कई उपाधि और पुरस्कारो से सम्मानित भी किया गया।

11 FAQs on Mahadevi Verma :

प्रश्न 1 : महादेवी वर्मा द्वारा रचित “मेरा परिवार” के सभी जानवर और पक्षी (पात्रों) के नाम बताइये?
उत्तर : मेरा परिवार में महादेवीजी ने निम्नलिखित पशुओं और पक्षियों के बारे में चर्चा की हैं – 
  • नीलकंठ (मोर)
  • गिल्लू (गिलहरी)
  • सोना (हिरण)
  • दुर्मुख (खरगोश)
  • गौरा (गाय)
  • नीलू (कुत्ता)
  • निक्की (नेवला)
  • रोज़ी (कुतिया)
  • रानी (घोड़ा)
प्रश्न 2 : महादेवी वर्मा को लिखना किसने सिखाया?
उत्तर : मैथिलि शरण गुप्त।

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रेती के फूल Ramdhari Singh (Dinkar) Biography in Hindi | रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय

मित्रों, आज हम “हिंदी साहित्य के दिनकर” नाम से प्रचलित “Ramdhari Singh dinkar Biography in Hindi” पढ़ने वाले हैं। इस लेख में इनके जीवन से जुड़ी हर जानकारी तथा इनकी रचनाएँ, उपलब्धियाँ, साहित्यिक विशेषताएँ आदि को विस्तार से बताया गया हे। दिनकरजी के जीवन के कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हे :

रेती के फूल Ramdhari Singh (Dinkar) Biography in Hindi | रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय
Ramdhari Singh Dinkar Biography & Images

Ramdhari Singh Dinkar Biography in Hindi (संक्षिप्त जानकारी) :

  • नाम – रामधारी सिंह दिनकर 
  • जन्मवर्ष – सन् 1908 ई० 
  • जन्म स्थान – गाँव (सिमरिया), जिला – मुंगेर (बिहार)
  • पिता – रवि सिंह 
  • माता – मनरूप देवी 
  • पुरस्कार – ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मभूषण 
  • प्रमुख रचनाएँ – “अर्धनारीश्वर”, “रेती के फूल”
  • मृत्यु –  24 अप्रैल 1974 
  • उम्र – 66 वर्ष 

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Ramdhari Singh Dinkar ka jivan parichay (जीवन परिचय) : 

ज्ञानपीठ पुरस्कार और पद्मभूषण से सम्मानित “रामधारी सिंह दिनकर” का जन्म, सन् 1908 में बिहार के मुंगेर जिले में स्थित “सिमरिया” ग्राम के एक कृषि परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम “रवि सिंह” तथा माता  का नाम “मनरूप देवी” था। दिनकर के बचपन में ही, इनके पिता का निधन हो गया था। 

इन्होने पटना विश्वविद्यालय से बी० ऐ० की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिर इन्हे “मोकाघाट” के माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

ये अपनी पढ़ाई को आगे भी जारी रखना चाहते थे, परन्तु पारिवारिक कारणों से इन्हे अपनी पढाई रोकनी पड़ी। इसके बाद दिनकरजी को, बिहार के सरकारी विभाग में “सब – रजिस्ट्रार” बनने का मौका मिला। कुछ समय पश्चात, इन्होने मुज़्ज़फरपुर के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष का पद संभाला। 

इनका राजनैतिक जीवन भी काफी उज्जवल रहा, भारत सरकार द्वारा इन्हे 3 बार राज्यसभा का सदस्य चुना गया। इनकी रचनाएं “अर्धनारीश्वर”, “वट-पीपल”, “मिटटी की और” आदि, हिंदी साहित्य जगत में इनके अमूल्य योगदान को दर्शाती हे। रामधारी सिंह दिनकर की 24 अप्रैल 1974 आकस्मिक मृत्यु हो गयी। 

Ramdhari Singh Dinkar ki rachnaye (रचनाएँ) : 

वैसे तो दिनकर ने कई विषयों पर अपनी लेखनी चलाई, लेकिन इनकी कुछ रचनाएँ बहुत प्रसिद्ध हुई : 

1. दर्शन और संस्कृति : इस विधा में इनके प्रसिद्ध रचनाएँ निम्नलिखित हे –

  • धर्म 
  • संस्कृति के 4 अध्याय 
  • भारतीय संस्कृति की एकता 


2. आलोचना ग्रन्थ : 

  • शुद्ध कविता की खोज 


3. यात्रा – साहित्य :

  • देश – विदेश 


4. निबंध संग्रह : 

  • अर्धनारीश्वर 
  • वैट-पीपल 
  • मिटटी की और 
  • रेती के फूल 
  • उजली आग 


5. बाल साहित्य : 

  • मिर्च का मज़ा 
  • सूरज का ब्याह 


6. काव्य संग्रह : 

  • रेणुका 
  • हुंकार 
  • उर्वशी 
  • रसवंती 
  • कुरुक्षेत्र 
  • रश्मिरथी 
  • परशुराम की प्रतीक्षा 
  • सामधेनी 

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Poems and books by Ramdhari Singh Dinkar (पद्य एवं गद्य रचनाएँ) :

“दिनकरजी” की अपने पूरे जीवन काल में अनेक कवितायेँ, किताबें, और कहानियां लिखी। इनकी हर रचना का उद्देश्य पाठक को लाभ पहुंचाते हुए हिंदी साहित्य की मधुरता, चंचलता और सरलता का स्पष्ट वर्णन करना होता था।
प्रसिद्ध लेखक “हरिवंशराय बच्चन” ने कहा था की – रामधारी सिंह दिनकर को उनकी गद्य रचना, भाषा, पद्य रचना, और हिंदी सेवा के लिए 4 ज्ञान पीठ पुरस्कार दिए जाने चाहिए। इनकी समस्त रचनाओं को गद्य एवं पद्य रचनाओं में विभाजित किया गया हैं। जिनका विवरण निम्नलिखित हैं :-

Poetry of Ramdhari Singh Dinkar (पद्य रचनाएँ) :

बारडोली-विजय सन्देश (1928), प्रणभंग (1929), रेणुका (1935), हुंकार (1938), रसवंती (1939), द्वंद्वगीत (1940), कुरुक्षेत्र (1946), धुप – छाँव (1947), सामधेनी (1947), बापू (1947), इतिहास के आंसू (1951), धुप और धुआँ (1951), दिनकर के गीत (1973), मिर्च का मज़ा (1951), रश्मिरथी (1952), दिल्ली (1954), नीम के पत्ते (1954)
नील – कमल (1955), कवी – श्री (1957), सीपी और शंख (1957), नए सुभाषित (1957),, लोककप्रिय कवी दिनकर (1960), उर्वशी (1961), परशुराम की प्रतिज्ञा (1963), आत्मा की आँखे (1964), कोयला और कवित्व (1964), मृत्ति-तिलक (1964), दिनकर की सूक्तियाँ (1964), हारे को हरिनाम (1970), संचीयता (1973), रश्मिलोक (1974)

Ramdhari Singh Dinkar books (गद्य रचनाएँ) :

मिटटी की और (1944), पंत-प्रसाद और मैथिलीशरण (1958), अर्धनारीश्वर (1952), हमारी सांस्कृतिक एकता (1955), भारत की सांस्कृतिक कहानी (1955), सांस्कृतिक के चार अध्याय (1956), उजली आग (1956), देश – विदेश (1957), राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता (1955), काव्य की भूमिका (1958),  वेणुवन (1958), धर्म, नैतिकता और विज्ञान (1969), वैट-पीपल (1961)
लोकदेव नेहरू (1965), हे! राम (1968), संस्मरण और श्रद्धांजलि (1970), भारतीय एकता (1971), रेती के फूल (1954), राष्ट्रभाषा आंदोलन और गांधीजी (1968), शुद्ध कविता की खोज (1966),साहित्य – मुखी (1968), मेरी यात्राएं (1971), चित्तोड़ का साका (1948), दिनकर की शायरी (1972), चेतना की शिला (1973)

Awards and achievement (पुरस्कार एवं उपलब्धियां) :

  • 1959 – इनकी रचना “संस्कृति के 4 अध्याय” के लिए इन्हे “साहित्य अकादमी पुरूस्कार” से सम्मानित किया गया। 
  • 1952 – भारत सरकार द्वारा इन्हे लगातार तीसरी बार राज्यसभा का सांसद चुना गया।
  • 1959 – भारत के प्रथम राष्ट्रपति “डॉ० राजेंद्र प्रसाद” ने इन्हे “पद्म-विभूषण” से सम्मानित किया।
  • 1962 – इस वर्ष इन्हे भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा (डी० लिट्०) की उपाधि से सामनित किया गया।
  • 1968 – दिनकर जी को “राजस्थान विद्यापीठ” ने “साहित्य चूड़ामणि” से सम्मानित किया।
  • 1999 – इनके मरणोपरांत, सरकार ने दिनकरजी के नाम पर “डाक – टिकट” की शुरवात भी की।
  • इनकी स्मृति में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री “नितीश कुमार” ने इनकी भव्य प्रतिमा का निर्माण भी करवाया। 
  • उस समय के केंद्रीय सुचना एवं प्रसारण मंत्री – “प्रियरंजन दास मुंशी” ने रामधारी सिंह दिनकर के व्यक्तित्व पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। 


Ramdhari Singh Dinkar ka sahityik parichay (साहित्यिक विशेषताएं) :

इनके चरित्र के तरह ही इनकी साहित्यिक रचनाओं की भी कई विशेषताएँ हैं। एक कवि के रूप में अपने साहित्यिक जीवन की शुरवात करने वाले “दिनकरजी” को देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत कवि  माना जाता हैं। इनकी रचनाओं में छायावादी युग का प्रभाव होने के कारण, श्रृंगार रस का भी प्रमाण मिलता हे। 
बाल साहित्य, निबंध संग्रह, आलोचना ग्रन्थ, दर्शन और संस्कृति विधा में अपनी लेखनी चलाने वाले “रामधारी सिंघ जी” ने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति में “बी० ऐ०” की डिग्री प्राप्त की।
इन्होनें हिंदी, संस्कृत, बांगला, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में अपनी मज़बूत पकड़ बनाई। भागलपुर विश्वविद्यालय में “उप-कुलपति” के रूप में कार्य करने के बाद इन्हे भारत सरकार ने “हिंदी सलाहकार” बना दिया। ये एक प्रगतिवादी और मानववादी कवि थे। 
इनकी ज्यादातर रचनाएँ वीर रस में होने के कारण, कवि “जन्मेजय” ने कहा था की – “कवि भूषण के अलावा, दिनकर ही एक मात्र कवि हे, जिन्होंने वीर रस का अधिकतम प्रयोग किया”। ये छायावाद की प्रथम पीढ़ी के कवि थे। भारत के स्वतंत्र होने से पहले, इन्हे “स्वतंत्रता के राष्ट्रकवि” के नाम से जाना जाता था। 
आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ने “दिनकरजी” के लिए अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा था की – “दिनकरजी अहिन्दीभाषियों में हिंदी के सबसे लोकप्रिय कवी हैं”।

FAQs on Ramdhari Singh Dinkar :

प्रश्न 1 : रामधारी सिंह दिनकरजी को “दिनकर” की उपाधि कब और क्यों मिली?
उत्तर : हिंदी साहित्य में रामदारी सिंह जी के अमूल्य योगदान को देखते हुए, इन्हे “दिनकर” की उपाधि से सम्मानित किया गया। 
प्रश्न 2 : रामधारी जी का जन्म कब और कहा हुआ था?
उत्तर : रामधारी सिंह दिनकर का जन्म सन् 1908 में बिहार के मुंगेर जिले में स्थित “सिमरिया” ग्राम में हुआ था।

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56 KM Traveller PV Sindhu Biography In Hindi | पी० वि० सिंधु का जीवन परिचय

नमस्कार दोस्तों, आज हम “golden girl”  के नाम से मशहूर “PV Sindhu Biography In Hindi” पढ़ने वाले हैं। इस लेख में सिंधु से जुड़ी हर जानकारी, जैसे – पी० वि० सिंधु की शिक्षा, इनका परिवार, पति, इनके चरित्र की  विशेषताएं, रोचक तथ्य, पुरस्कार एवं उपलब्धियां आदि को विस्तार से बताया गया हैं। “पी० वि० सिंधु की जीवनी” को विस्तार … Read more