Philanthropist Ratan TATA Biography in Hindi | महादानी रतन टाटा का जीवन परिचय

नमस्ते  मित्रों, आज हम भारत के सबसे महान उद्योगपति, “Ratan TATA Biography in Hindi” के बारे में पढ़ने वाले हैं। रतन टाटा ना केवल एक सफल उद्योगपती हैं, बल्कि भारत के सबसे बड़े दानी भी हैं। इस लेख में आपको इनके जीवन से जुड़ी हर छोटी – बड़ी जानकारी दी गई हैं। जैसे – इनका बचपन, शिक्षा, व्यापारिक गुण, परिवार, उपलब्धियां एवं सम्मान, आदि। 

Ratan TATA Biography in Hindi
Ratan TATA Biography in Hindi (Images)
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Quick overview of Ratan Tata biography in hindi (मुख्य बिंदु) :

  • नाम – रतन टाटा 
  • जन्मदिनांक – 28 दिसंबर 1937 
  • स्थान – सूरत (गुजरात) 
  • पिता – नवल टाटा 
  • माता – सोनू टाटा 
  • भाई – जिमी, नोएल टाटा 
  • धर्म – पारसी 
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • व्यवसाय – टाटा इंडस्ट्री 
  • पद – टाटा इंडस्ट्री के अध्यक्ष 
  • कुल संम्पत्ति (net worth) – 1 अरब डॉलर 
  • पुरस्कार – पद्मभूषण (सन् 2000), पद्मविभूषण (सन् 2008)
  • आयु – 82 वर्ष

Ratan Tata biography in Hindi (रतन टाटा का जीवन परिचय) :

भारत के सबसे बड़े दानी और टाटा समूह को नई उच्चाइयों पर पहुँचाने वाले “रतन टाटा” का जन्म 28 दिसंबर 1937 को गुजरात के सूरत में हुआ था। इनके पिता का नाम “नवल टाटा” और माता का नाम “सोनू टाटा” था। 
इनके भाई का नाम “जिमी” और “नोएल टाटा” हैं। रतन टाटा ने अपने जूनून और सही दिशा में मेहनत करते हुए टाटा इंडस्ट्री को पूरे विश्व में सफलतापूर्वक स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज टाटा इंडस्ट्री लगभग 100 से भी ज्यादा क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाये हुए हैं। 
सन् 1991 में रतन टाटा को इंडस्ट्री का पांचवे अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। जिसके बाद इन्होने अपनी व्यापारिक सूझ – बुझ से कई घाटे में चल रही कंपनियों को मुनाफा देने वाली कंपनियों में परिवर्तित कर दिया।
इन्होने न केवल अपना मुनाफा बढ़ाने की और ध्यान दिया बल्कि, देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए अपने लाभ का कुछ हिस्सा हर साल दान करने का भी निर्णय लिया।   
कई सालों तक अपनी सेवा देने के बाद “रतन टाटा” ने 28 दिसंबर 2012 को 75 वर्ष की आयु में अपने पद से स्तीफा दे दिया। इनके पूरे व्यापारिक जीवन और टाटा इंडस्ट्री के विकास की कहानी निचे दी गई हैं। 

Ratan Tata family tree (रतन टाटा का परिवार) :

वैसे तो कहा जाता हैं की इनका परिवार काफी बड़ा और पेचीदा हैं। लेकिन, हम आपको रतन टाटा के परिवार के मुख्य पात्रों के बारे में स्पष्टता से बताने का प्रयास करेंगें। 
इनके पिताजी नवल टाटा और माताजी सोनू टाटा का शुरवाती वैवाहिक जीवन तो ठीक रहा लेकिन, जब रतन टाटा 10 वर्ष के थे तब दोनों अलग हो गए। ऐसी परिस्थिति में इनका और भाई “जिमि” का पालन पोषण, दादी “नवजबाई टाटा” ने किया। 
रतनजी अपनी दादी के बारे में बताते हे की वह बेहद अनुशाषित, होशियार और कठोर स्वाभाव की महिला थी। इनके पिता नवल टाटा ने दूसरी शादी “सिमोन” के साथ की थी और इनका एक बेटा भी हुआ। मतलब रतन टाटा के सौतेले भाई का नाम “नोएल टाटा” हैं। 
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Ratan Tata marriage, wife, son, daughter (पत्नी और बेटा) :

कई इंटरव्यूज में जब रतन टाटा से उनकी शादी के बारे में पुछा गया। तो वे बताते हैं की – उन्होंने कई बार शादी करने का प्रयास किया लेकिन, किसी न किसी कारण से उनकी शादी रुक गई। 
वे चार बार शादी के बेहद करीब पहुंचे लेकिन, सफल न हो सके। एक बार तो उनकी दोस्त, शादी के लिए भारत  आने की तैयारी कर रही थी लेकिन, भारत चीन युद्ध के कारण वह आने में असफल रही। 

Ratan Tata education (रतन टाटा शिक्षा) :

एक सफल उद्योगपति बनने से पहले रतन टाटा ने अपने प्राथमिक और विश्वविद्यालयीन शिक्षा पर ध्यान दिया।  इन्होनें मुंबई और शिमला के “कैंपियन स्कूल” तथा “कैथेड्रल एंड जॉन कैनन स्कूल” से अपनी विद्यालय स्तरीय शिक्षा पूरी की। 
इसके बाद ये अपनी उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। वहां इन्होने सन् 1962 में कैलिफ़ोर्निया के “Cornell University” से “architecture in structural engineering”  में स्नातक की डिग्री हासिल की। 
उस समय किसी भारतीय का विदेश जाकर पढाई करना बेहद गौरवपूर्ण माना जाता था। इससे रतन टाटा की इज़्ज़त और भी बढ़ गई। उस समय मशहूर कंपनी “IBM” ने इन्हे नौकरी का अवसर भी दिया। जिसे रतनजी ने स्वीकार कर लिया और लगभग 15 दिनों तक काम भी किया। 
लेकिन, कुछ दिनों बाद ही टाटा इंडस्ट्री के तत्काल अध्यक्ष “JRD TATA” ने इन्हे वापस भारत आकर अपना खानदानी व्यवसाय सम्भालनें को कहा। जिसके बाद ये भारत लोट आए और व्यापारिक जगत में खूब प्रतिष्ठित हुए।

How Tata industry started? (टाटा इंडस्ट्री की शुरवात) :

वर्तमान में टाटा इंडस्ट्री भारत सहित पूरे विश्व की सबसे सफलत कंपनियों में शामिल हैं। लेकिन, इस सफलता के पीछे कई महापुरषों की सालों की मेहनत और लगन का हाथ हैं। 
सन् 1868 में टाटा परिवार की शान “जमशेतजी टाटा” ने “टाटा इंडस्ट्री” की स्थापना की थी। लेकिन, पहले ये सिर्फ सिमित क्षेत्रों में ही काम किया करती थी। पर कई वर्षों तक सफल नेतृत्व में टाटा इंडस्ट्री का विकास हुआ और धीरे – धीरे यह लगभग हर क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगी। 
कई वर्षो तक अलग – अलग अध्यक्षो ने इस इंडस्ट्री की अध्यक्षता की। लेकिन, साल 1938 में “जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (JRD TATA)” को इस उद्योग का चौथा अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 
जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा की अध्यक्षता में पूरे उद्योग का असीम विकास हुआ और कई नए कीर्तिमान भी स्थपित हुए। ये एक बेहद ही साहसी और दूरदृष्टि वाले इंसान थे और ये भारत के “उद्योग क्षेत्र” को बदलना चाहते थे। 

Ratan Tata relations with JRD Tata (रतन टाटा और जे आर डी टाटा के सम्बन्ध) :

जे आर डी टाटा ये जानते थे की किसी भी देश के उद्योग क्षेत्र के विकास के लिए “धातु (METAL)” सबसे ज़रूरी पदार्थ होता है। इसी कारण वे अपने घोड़े पर बैठकर, खानों की खोज में निकल जाया करते थे। 
ये इस बात का भी ध्यान रखते थे की इनके लिए काम कर रहे मज़दूरों को किसी भी प्रकार की असुविधा ना हों। इसके लिए इन्होने कई नीतियाँ भी बनाई। जिसके अंतर्गत टाटा उद्योग में कार्यरत सभी कर्मचारियों को स्वास्थ सुविधाएँ, भविष्य निधि, 8 घंटे काम करने का समय भी निश्चित किया गया।
रतनजी के इनके रिश्ते बहुत गहरे थे और ये भी कहते हे की अगर जहांगीरजी नहीं होते तो, शायद वो आज इतने सफल नहीं हो पाते। इन्होने अपनी कार्यशैली और मेहनत से कभी भी JRD TATA को निराश नहीं किया। 

Ratan Tata success story (रतन टाटा की सफलता की कहानी) :

जब वे अमेरिका में नौकरी कर रहे थे तब उन्हें JRD TATA ने भारत आकर व्यवसाय करने को कहा था। तब सन् 1962 में, ये भारत आकर “टाटा स्टील” से जुड़ गए और एक सफल नेतृत्व के कारण इन्होने कई प्रकार की व्यापारिक नीतियां सीखी। 
स्टील क्षेत्र का कम ज्ञान होने के कारण इन्होनें अपनी शुरवात, एक तकनिकी सहायक के रूप में की। कुछ समय तक यह काम करने के बाद, रतनजी ऑस्ट्रेलिया चले गए और कुछ समय बिताने के बाद भारत लोट आए।
ऑस्ट्रेलिया जाकर इन्होने “आधुनिक टेक्नोलॉजी” के बढ़ते चलन को देखा। इन्हे ये समझ आगया था की आने वाले समय में “टेक्नोलॉजी” के क्षेत्र में कई अवसर पैदा होने वाले हैं। 
इसी कारण इन्होनें JRD TATA से टाटा स्टील में काम करने से मना कर दिया और आधुनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विस्तार करने का निर्णय लिया।

Success story of TCS (टी सी एस कंपनी की सफलता) :

तब रतन टाटा को “National Radio and Electronics Company Limited” (NELCO)  का अध्यक्ष बना दिया गया। लेकिन, उस समय (NELCO) पुराने उपकरणों के साथ काम कर रही थी जिस वजह से बाजार में उसकी हिस्सेदारी महज़ 2% ही रह गई थी। 
तब रतनजी ने इसे मुनाफे में लाने के लिए नए तकनिकी उपकरण बनाने की शुरवात की। देखते ही देखते 10 साल के अंदर पूरी कंपनी ऋण मुक्त हो गई और रेडिओ क्षेत्र की 20% हिस्सेदार भी बन गई। 
कुछ वर्षों बाद, इसी कंपनी का नाम “TATA Consultancy Service (TCS)”  रखा गया। एक सफल नेतृत्व के कारण TCS ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए और भारत की GDP के सर्विस क्षेत्र में 53% की हिस्सेदार भी बनी। 
रत्न टाटा बताते हैं की, जब उन्होंने (NELCO) जैसी कंपनी को भी लाभदायक बना दिया था। तब से उन्हें कई ओऱ नुक्सान में चल रही कंपनियों की ज़िम्मेदारी दी गई और उन्हें भी लाभदायक बना दिया। 
  

Ratan Tata – 5th chairman of Tata industry (अध्यक्ष पद) :

कई वर्षों तक अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवा देना के बाद “जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (JRD TATA)” ने सन् 1991 में अपने पद से स्तीफा दे दिया। कई सालों तक इन्होनें रतन टाटा को इस व्यापर को बेहद कुशलता से सँभालते हुए भी देखा था।  
जिस कारण इन्होनें युवा रतन टाटा को “टाटा उद्योग” का पाचवां (5th) अध्यक्ष बनाने का नर्णय लिया। इनके इस निर्णय से कई वरिष्ठ अधिकारी असहमत हुए क्योंकि उनका कहना था की ये पद केवल ज्येष्ठता के अनुसार ही दिया जाना चाहिए। 
लेकिन, इन्होने अपनी व्यापारिक नीतियों से पूरे व्यवसाय में क्रांति लाने का काम किया और टाटा उद्योग के मुनाफे और प्रतिष्ठा दोनों को कई गुना बढ़ा दिया। 

Ratan Tata history in hindi (रतन टाटा की राजीव गाँधी से भेंट) :

रतन टाटा भारत को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुत समर्थ राष्ट्र बनाना चाहते थे, इनके पास कई सारी योजनाएं भी थी। राजीव गांधी उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री थे और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बेहद रुचि और समझ भी रखते थे। 
तब दोनों की उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें रतन टाटा ने अपनी सारी योजनाएं बताई। जिससे राजीव गाँधी पूरी तरह सहमत हुए और टाटा को उचित कदम उठाने की अनुमति देदी। 
जिसके बाद टाटा उद्योग ने कई बड़ी देशी और विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी की और नए रिकार्ड्स बनाए। 

Owner of Jaguar and Land Rover (टाटा मोटर्स की सफलता) :

कई क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ने के बाद, टाटा ने वाहनों के क्षेत्र में प्रवेश किया। 
साल 1998 में “टाटा मोटर्स” ने “इंडिका” कार की शुरवात की। लेकिन, अपने शुरवाती दिनों में इन्हे सफलता नहीं मिली और थोड़ा नुक्सान भी हुआ। 
जिसके बाद, रतनजी “फोर्ड कंपनी” के मालिक “बिल फोर्ड” के पास गए और उन्हें अपनी कंपनियों को खरीदने के लिए आग्रह किया। उस समय फोर्ड ने रतन टाटा का अपमान करते हुए कहा की, जब तुम ऐसे उद्योगों को चला नहीं सकते तो शुरवात क्यों करते हो। हम इन कंपनियों को खरीद कर तुम एहसान कर रहे हैं। 
ये बात सुनकर इन्हे बेहद बुरा लगा और मीटिंग छोड़ कर वापस चले आए और इन्ही कंपनियों को सफल बनाने में लग गए। लगभग 8 वर्षों बाद, फोर्ड कंपनी दिवालिया हो गई और रतन टाटा से मदद मांगी। 
तब टाटा ने Jaguar और Land Rover कंपनियों को खरीद कर फोर्ड पर एहसान किया। ये दोनों कंपनियां आज टाटा को सबसे ज्यादा राजस्व देती हैं। 

Success principles of Tata group (सफलता के सिद्धांत) :

जब रतन टाटा, टाटा ग्रुप के अध्यक्ष बने तब ये उद्योग लगभग 50 क्षेत्रों में काम करता था। हर क्षेत्र में काम कर रही टाटा कंपनी का प्रतिक चिह्न और सिद्धांत अलग अलग थे। 
तब पूरे समूह के हर एक कर्मचारियों को एकता में बांधने के लिए, इन्होनें कुछ नियम और निम्नलिखित सिद्धांत बनाये जिसे हर किसी को मानना ज़रूरी था। 
  1. अखंडता (INTEGRITY)
  2. एकता (UNITY)
  3. आपसी समझ (UNDERSTANDING)
  4. उत्क्रष्ट्ता (EXCELLENCE) 
  5. समानता (EQUALITY) 

Ratan Tata quotation (अनमोल विचार) :

वैसे तो इनके द्वारा कहे गए कई Quotes प्रचलित हैं, लेकिन इनके कुछ विचार ऐसे हैं जो इंसान की सोच को बदल सकते हैं। 
जो पत्थर लोग आप अपर फेंकते हैं, उन्हें इकठ्ठा करके अपना महल बना लीजिये।

लगातार अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए परिश्रम करते रहिये, एक दिन सफलता ज़रूर मिलेगा।

Contribution (योगदान) :

21 सालों तक अध्यक्ष रहते हुए इन्होने कई निर्णय लिए और कई ऐसे बदलाव किए जिससे टाटा इंडस्ट्री का विकास हुआ और राजस्व 40% बढ़ा और मुनाफा 50% तक बढ़ गया। 

Ratan Tata appoints Cyrus Mistry (सायरस मिस्त्री की नियुक्ति) :

28 दिसंबर 2012 को 75 वर्षीय रतन टाटा ने अपनी बढ़ती उम्र के कारण, अध्यक्ष पद से स्तीफा दे दिया। स्तीफा देने से पहले इन्होनें नए अध्यक्ष के लिए बेहद खोज की और अंत में “सायरस मिस्त्री” को टाटा इंडस्ट्री के छठे अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया। 
इन्होनें  सायरस मिस्त्री को चुन कर ये साबित कर दिया की, टाटा समूह केवल योग्यता को बढ़वा देता हैं। 
लेकिन, साल 2017 में  सायरस मिस्त्री ने कंपनी के सिद्धांतों का उल्लंघन किया, जिसके चलते रतन टाटा नाराज़ हो गए और इन्हे अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया। 
इसके बाद, 12 जनवरी 2017 को “नटराजन चंद्रशेखरन” को नए अध्यक्ष के रूप में चुन लिया गया। 

Story of Nano car (नेनो कार की कहानी) :

रतनजी का यह सपना रहा की भारत के हर परिवार के पास एक कार हो, इसी सपने को पूरा करने के लिए इन्होनें नेनो कार बाजार में उतरी। जिसकी कीमत महज़ 1 लाख रूपए थी। 
लेकिन, सही तरीके से विज्ञापन ना कर पाने के कारण ये कार असफल रही। 

How much Ratan tata donate? (रतन टाटा कितना दान करते हे) :

समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए, इन्होने “TATA TRUST” की शुरवात की, जिसका उद्देश्य हर साल हुए मुनाफे का कुछ हिस्सा लोकहित में दान करना हैं। 
“TATA INDUSTRY” का ज्यादातर मुनाफा इसी ट्रस्ट में चला जाता हैं, जिस कारण पूरी दुनिया में रतन टाटा की छवि एक महान दानी के रूप में भी हैं। 
एक समय करेला में आई बाढ़ के कारण कई मछुवारों के घर बह गए थे, तब इसी ट्रस्ट ने मछुवारों को लगभग 700 घर बनाकर दिए थे। 

Ratan Tata net worth (कूल संपत्ति) :

जैसा की हमने बतया की, रतन टाटा ने “टाटा ट्रस्ट” की शुरवात करने के बाद अपनी कमाई का आधा से ज्यादा भाग दान करने की पहल की। 

जिस कारण ये विश्व के सबसे आमिर व्यक्तियों की सूची में नहीं जुड़ सके। इनकी कूल सम्पति 830 मिलियन डॉलर हैं। 


Achievements (उपलब्धियां) :

वर्ष 1998 – इस साल इन्होनें “टाटा इंडिका कार” बाजार में पेश की, ये भारत की पहली यात्री कार थी और महज़ 2 सालों में ही ये भारत की नंबर 1 कार बन गई। 
वर्ष 2000 – इस साल टाटा ने “संयुक्त राज्य” के सबसे बड़े और विश्व के दूसरे सबसे बड़े “चाय पत्ती उत्पादक एवं वितरक समूह – TETLEY ” को खरीद लिया। 
वर्ष 2001 – इनके नेतृत्व में टाटा समूह ने “बीमा” के क्षेत्र में कदम रखा और सफलता अर्जित की। 
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वर्ष 2003 – इनके द्वारा स्थापित की गई “TATA Consultancy Service (TCS)”, भारत की पहली सॉफ्टवेयर कंपनी बानी जिसने 1 अरब डॉलर का राजस्व हासिल किया। 
वर्ष 2008 – इस साल टाटा मोटर्स के इतिहास की सबसे सफल डील हुई, जिसके अंतर्गत Jaguar और Land Rover कंपनियों को खरीद लिया गया। 
टाटा समूह ने ही सबसे पहले अपने कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि, सुरक्षा बीमा, स्वस्थ सुविधा, 8 घंटे की शिफ्ट, आदि सुविधाएँ अमल में लाने का काम किया था। 

Awards (पुरस्कार एवं सम्मान) :

भारत का सम्मान बढ़ने वाले रतन टाटा को भी अलग अलग पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका हैं। 
  • कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने इन्हें “डॉक्टरेट” की डिग्री से सम्मानित किया हैं। 
  • भारत सरकार द्वारा इन्हें सन् 2000 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। 
  • सन् 2008 में एक बार फिर सरकार द्वारा पद्म-विभूषण से सम्मानित किया। 
  • इनकी प्रतिष्ठा और महानता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता हे की, विश्वप्रसिद्ध “हार्वर्ड विश्वविद्यालय” ने इनके नाम से एक बिल्डिंग का ही निर्माण करा दिया।

04 FAQs on Ratan Tata :

प्रश्न 1 : क्या रतन टाटा, मुकेश अम्बानी और बिल गेट्स से ज्याद आमिर हैं?
उत्तर : उद्द्योगपति  रतन टाटा अपनी ज्यादातर कमाई को दान कर देते हैं। इसलिए उनकी कूल संपत्ति भी काम हैं। लेकिन, कमाई और संपत्ति के आधार पर अम्बानी और टाटा में तुलना करना काफी मुश्किल कार्य हैं। 
प्रश्न 2 : रतन टाटा जी को कोनसा पुरस्कार मिला?
उत्तर: पद्मभूषण और पद्मविभूषण। 
प्रश्न 3 : रतन टाटा का बेटा हे या बेटी?
उत्तर : रतन टाटा अविवहित हैं। 
प्रश्न 4 : Lady Ratan Tata Cup किस खेल में दिया जाता हैं?
उत्तर: हॉकी। 

Final words on Ratan Tata biography in Hindi :

Ratan TATA biography in hindi में हमने जाना की किस तरह रतन टाटा ने हमेशा अपने मुनाफे और विस्तार, से भी पहले अपने सामाजिक कर्तव्यों और सिद्धांतों को महत्ता दी। 

हमें आशा हे की आपको भी ये जीवन यात्रा पसंद आई होगी और कई सिद्धांत भी सिखने को मिले होंगे। इस लेख को आप अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे। 

यदि हमसे Ratan TATA biography in hindi में कोई पहलु छूट गया हो तो हमे कमैंट्स में ज़रूर बताएं। 
धन्यवाद!! 

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