About Sumitranandan Pant Biography in Hindi | (बुढ़ा चाँद के लेखक) सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय

About Sumitranandan Pant in Hindi : नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको “छायावाद के विष्णु” नाम से प्रसिद्द Sumitranandan Pant Bioraphy in Hindi  बताने जा रहे हैं। पंतजी के जीवन को विस्तार से समझने से पूर्व, हम उनके जीवन परिचय की मुख्य बिंदु जैसे – जन्म स्थान, माता-पिता, मुख्य रचनाए, शिक्षा, उपाधि और सम्मान, आदि को संक्षेप में समझते हे। 

About Sumitranandan Pant Biography in Hindi | (बुढ़ा चाँद के लेखक) सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय
Sumitranandan Pant Biography in Hindi & Images


About Sumitranandan Pant in Hindi
(मुख्य बिंदु) :

  • नाम – सुमित्रानंदन पंत (Sumitra Nandan Pant)
  • जन्म-नाम – गुसाई दत्त 
  • जन्म-तिथि – 20 मई 1900 
  • स्थान – ग्राम  कौसानी (अल्मोड़ा), उत्तराखंड 
  • पिता का नाम – गंगाधर पंत 
  • माता का नाम –  सरस्वती देवी  
  • मृत्यु – दिनांक – 29 दिसंबर 1977 
  • आयु – 76 वर्ष 
  • मुख्य रचना – लोकायतन और पल्लव 

Biography of Poet Raskhan in Hindi

10 FAQs on Sumitranandan Pant :

प्रश्न 1 : सुमित्रानंदन पंत का जन्म स्थान क्या हैं?
उत्तर : ग्राम  कौसानी (अल्मोड़ा), उत्तराखंड।  
प्रश्न 2 : सुमित्रनंदनजी के भाई का नाम क्या हैं?
उत्तर: देवीदत्त। 
प्रश्न 3 : सुमित्रानंदन पंत को “प्रकृति का बेजोड़ कवि” क्यों कहा जाता हैं?
उत्तर : पंत जी द्वारा प्रकृति की सुंदरता और संरक्षण के विषय में की गई रचनाओं के कारण इन्हे “प्रकृति के बेजोड़ कवि” की उपाधि से सम्मानित किया गया। 
प्रश्न 4 : सुमित्रानंदन पंत के कितने भाई-बहन हैं?
उत्तर:
प्रश्न 5 : हिंदी विषय पर प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले साहित्यकार कोण थे?
उत्तर : सुमित्रानंदन पंत, वर्ष 1969 में। 
प्रश्न 6 : माता की मृत्यु के बाद सुमित्रानंदन पंत किसकी छत्रछाया में पीला बढे ?
उत्तर : माँ की मत्र्यु के बाद में पिता और दादी ने इनका पालन – पोषण किया। 
प्रश्न 8 : सुमित्रानंदन पंत को “ज्ञानपीठ पुरस्कार” क्यों मिला?
उत्तर: चिदाम्बरा।
प्रश्न 9 : क्या सुमित्रानंदन पंत को “छायावाद का विष्णु” भी कहा जाता हैं?
उत्तर : हाँ, पंतजी को ही छयावाद का विष्णु भी कहा जाता हैं।
प्रश्न 10 : सुमित्रानन्दन पंत की रचना “पल्लव” कब प्रकाशित हुई/
उत्तर : सन् 1928 में। 
  

Hindi Poet Sumitranandan Pant Bioraphy in Hindi (जीवन परिचय) :

हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक एवं कवि – “सुमित्रानंदन पंत” का जन्म 20 मई 1900 ई० को उत्तराखंड (राज्य) के अल्मोड़ा स्थित कौसानी गांव में हुआ। पंतजी अपनी माता (सरस्वती देवी) और पिता (गंगाधर पंत) की 8वी संतान थे। 

इन्होने अपनी माध्यमिक शिक्षा अपने ग्राम अल्मोड़ा से ही ग्रहण की लेकिन, अपनी उच्च शिक्षा के लिए वर्ष 1918 में इलाहाबाद (प्रयागराज) चले गए। इनकी प्रमुख रचनाये हैं – लोकायतन और पल्लव। 

कहा जाता हे की, सुमित्रनंदन पंत के जन्म के 6 घंटे पश्चात ही इनकी माता की मृत्यु हो गयी। माँ के अभाव में पिता और दादी ने इनका पालन – पोषण किया। जन्म के समय इनका नाम “गोसाई दत्त” था, लेकिन नाम पसंद न आने के कारण अपना नाम गोसाई दत्त से “सुमित्रानंदन पंत” रख लिया।

साल 1950 से 1957 तक, इन्होने “ऑल इंडिया रेडियो” (All India Radio) में “आकाशवाणि” में परामर्शदाता (consultant) का काम किया। एक शिक्षक,लेखक और कवि के रूप में समाज को अपना मुख्य योगदान देने वाले सुमित्रानंदन पंतजी का 29 दिसंबर 1977 को 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया।


Education (असहयोग आंदोलन का शिक्षा पर प्रभाव) :

अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने बाद, इनके भाई 1918 में इन्हे उच्च शिक्षा के लिए काशी के “Queen’s College” लेकर गए। लेकिन, सुमित्रनन्दनजी ने वहां जाने से मना कर दिया और अपनी इच्छा अनुसार प्रयागराज के “Mayor’s College” को चुना। 

जब वे अपनी बी०ऐ० (B A – बैचलर ऑफ़ आर्ट्स) की पढाई कर रहे थे, तब ही महात्माँ गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरुवात की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अँग्रेज़ सरकार के स्कूलों, महाविद्यालयो, न्यायलय आदि का पूर्ण रूप से त्याग करना था। 

इस अभियान में अपना सहयोग देते हुए, सुमित्रानंदन पंत ने अपनी पढाई छोड़ दी और खुद से ही विभिन्न भाषाओ का ज्ञान प्राप्त करना प्रारम्भ कर दिया। इनकी 4 भाषाओं पर काफी मजबूत पकड़ थी – हिंदी, संस्कृत,बांग्ला और अंग्रेजी। 


Sumitranandan Pant ki rachnaye (रचनाएँ) :

इनकी पहली कविता “गिरजे का घंटा” थी, जो की वर्ष 1916 ई० में प्रकाशित हुई। इनकी एक और प्रमुख रचना “पल्लव” कोछायावाद का घोषणापत्र”  भी कहा जाता हे। 

इनकी काव्य रचनाओं को 4 भागों में विभाजित किया गया हे : 

  • छायावादी रचनाएँ 
  • मानवतावादी रचनाएँ 
  • प्रगतिवादी रचनाएँ 
  • अरविन्द दर्शन से प्रभावित रचनाएँ

Sumitranandan Pant Poems in Hindi :

अब हम इन रचनाओं के बारे में विस्तार से पढ़ते हैं – 

छायावादी रचनाएँ – पंतजी द्वारा सन 1918 से 1934 ई० में की गई रचनाओं को “छायावादी रचनाएँ” कहा जाता हे और इस युग को “छायावादी युग” कहा जाता हे। इनकी प्रमुख छायवादी रचनाएँ निम्नलिखित हे –

  • उच्छवास – रचना वर्ष (1920 )
  • ग्रंथि – रचना वर्ष (1920 )
  • वीणा – वर्ष (1927 )
  • पल्लव – रचना वर्ष (1928 )
  • गुंजन – रचना वर्ष (1923 )

प्रगतिवादी रचनाएँ सन् 1935 से 1946 ई० को प्रगतिवादी युग कहा जाता हे, तथा सुमित्रानंदन जी की प्रमुख प्रगतिवादी रचनाएँ हे –

  • युगवाणी – सन् 1939 ई० 
  • युगान्त – सन 1936 ई०
  • ग्राम्या – सन् 1940 ई०

Sumitranandan Pant poetry :

अरविन्द दर्शन से प्रभावित रचनाएँ – सन् 1946 से 1948 ई० को अन्तश्चेतनावादी युग कहा जाता हे, और इस युग की रचनाओं को “अरविन्द दर्शन से प्रभावित रचनाएँ” कहा जाता हे।

  • स्वर्णकिरण – रचना वर्ष (1947)
  • स्वर्णधूलि – वर्ष (1947 ई०)
  • युगांतर – रचना वर्ष (1948)
  • योगपथ – वर्ष (1948 ई०)

मानवतावादी रचनाएँ –  सन् (1949 ई० से अब तक) को नव मानवतावादी युग तथा आध्यात्मिक युग भी कहा जाता हे, तथा सुमित्रानंदन जी की प्रमुख मानवतावादी रचनाएँ हे –

  • रजतशिखर – रचना वर्ष (1951 ई०)
  • पतझर 
  • लोकायतन – रचना वर्ष (1964 ई०)
  • अभिषेकिता 
  • अंतिमा – रचना वर्ष (1955 ई०)
  • समाधिता 
  • वापी – रचना वर्ष (1957 ई०)
  • चिदंबरा – रचना वर्ष (1959 ई०)
  • शशि की तरी 
  • कला और बूढ़ा चाँन्द – रचना वर्ष (1959 ई०)

Sumitranandan Pant Awards and Achievement (पुरस्कार और उपलब्धियां) :

हिंदी साहित्य जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले, पंत को अपनी प्रभावशाली रचनाओं के लिए कई पुरस्कार और उपलब्धियां प्राप्त हुई।

  1. 1958 – इन्होने “युगवाणी से वाणी” काव्य की कविताओं का संकलन कर “चिदंबरा” की रचना की। इस कार्य के लिए इन्हे “ज्ञानपीठ पुरस्कार” प्राप्त हुआ।
  2. 1960 – अपनी प्रमुख रचना “कला और बूढ़ा चाँद” के लिए सुमित्रनंदनजी को “साहित्य अकादमी पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, राजकुमार वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला  जैसे कवियों के युग को “छायावादी युग” कहा जाता हे। सुमित्रानंदन पंत इस युग के 4 स्तम्भों में से एक थे। 

जिस घर में सुमित्रनंदन पंत ने अपना सम्पूर्ण जीवन व्यतीत किया, उसे आज “सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका” (संग्रहालय) के नाम से जाना जाता हे। इस संग्रहालय में, इनके कपड़े, चश्मे, कलम आदि व्यक्तिगत वस्तुएं संभाल कर रखी गई हैं।

इनकी रचनाऐं लोकायतन, आस्था, कविता संग्रहों की पांडुलिपियां तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार का प्रशस्तिपत्र सुरक्षित रूप से इस संग्रहालय में रखा हुआ हे। 

इसके अतिरिक्त, हरिवंशराय बच्चन के साथ किये गए इनके पत्र-व्यव्हार की प्रतिलिपियाँ भी मोजुद हे।


Unknown Facts About Sumitranandan Pant in Hindi (महत्वपूर्ण तथ्य) :

अब हम इनके जीवन से जुड़े कुछ अनोखे तथ्यों को जानेंगे :

  • इनका जन्म-नाम “गुसाईं दत्त”  था। 
  • ये हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी में पारंगत थे।
  • वर्ष 1938 में इन्होने मासिक पत्रिका “रूपाभ” का संपादन किया था।
  • “असहयोग आंदोलन” के कारण इन्होने अपनी पढाई पूरी नहीं की। 
  • महात्मा गांधी के सानिध्य में इन्हे “आत्मा के प्रकाश” का ज्ञान प्राप्त हुआ। 
  • इन्हे “छायावाद के विष्णु” की उपाधि प्राप्त हे। 
  • सुमित्रानंदन पंत को “प्रकृति का सुकुमार कवि” भी कहा जाता हे। 

Final words about Sumitranandan Pant Bioraphy in Hindi (मेरा पक्ष) :

मित्रों, आज हमने आपको प्रसिद्ध कवि और लेखक “सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय” दिया। इस महान व्यक्तित्व की शिक्षा, साहित्यिक रचनाओं, साहित्यिक विशेषताओं, सम्मान व उपाधियों के बारे में जितना चिंतन किया जाए, उतना कम हे। 

अगर हमसे “Sumitranandan Pant Bioraphy in Hindi, poetry, kavyagat visheshta, kavitayen (poems), books”  में से कोई जानकारी अछूती रह गई हो तो हमे ज़रूर बताएं।

धन्यवाद!!

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