विधवा के लेखक – Suryakant Tripathi Nirala Biography in Hindi | सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय

“छायावाद के महेश” नाम से प्रसिद्द “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय” बहुत प्रेरणादायक हैं। अगर आप भी साहित्य के क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हे तो, आपको “Suryakant Tripathi Nirala biography in hindi” को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। इनके जीवन से जुड़ी कई बिंदुओं को हम आगे विस्तार से पढ़ेंगे, जैसे – इनकी रचनाएं, साहित्यिक विशेषताएं, पुरस्कार एवं सम्मान, आदि। 

विधवा के लेखक - Suryakant Tripathi Nirala Biography in Hindi | सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय
Suryakant Tripathi Nirala Biography & Images


About Suryakant Tripathi Nirala in hindi (मुख्य बिंदु) :

  • नाम – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला 
  • जन्मनाम – सूर्यकुमार 
  • जन्मवर्ष – सन् 1896 ई० 
  • जन्म स्थान – मेदिनीपुर जिला – (बंगाल)
  • पिता – रामसहाय त्रिपाठी
  • आदर्श – स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस 
  • प्रमुख रचनाएँ – शकुंतला (नाटक), अनामिका, तुलसीदास (काव्य संग्रह) 
  • मृत्युदिनांक – 15 अक्टूबर 1961 ई०

Sumitranandan Pant Bioraphy in Hindi

03 FAQs on Suryakant Tripathi Nirala :

प्रश्न 1 : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को कोनसा पुरस्कार (awards) से सम्मानित किया गया था?
उत्तर : पद्मविभूषण। 
प्रश्न 2 : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मृत्यु कब, कहाँ और कैसे हुई?
उत्तर : ख़राब स्वास्थ के कारण, 15 अक्टूबर 1961 ईस्वी को उत्तरप्रदेश के इलाहबाद में निरालाजी की मृत्यु हो गई। 
प्रश्न 3 : क्या अनामिका, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की बेटी थी?
उत्तर : नहीं,  सूर्यकांत त्रिपाठी जी की बेटी का नाम सरोज था। 

Suryakant Tripathi Nirala biography in Hindi (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय) :

साहित्य जगत के अनमोल रतन “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला” का जन्म, सम्वत 1955 अर्थात सन् 1896 ई०  में बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ था। इनके पिताजी का नाम “रामसहाय त्रिपाठी” था, जो की “महिसादल राज” के कर्मचारी थे। निराला ने अपना पूरा बचपन बंगाल में व्यतीत किया तथा साहित्य और संगीत में अपनी रूचि बढ़ाई।

इसी साहित्यिक रुचि के कारण इन्होने कई विश्वप्रसिद्ध कविताओं, उपन्यासों और कहानियों की रचना की। सूर्यकांतजी को “छायावाद का महेश”, “आधुनिक काल का गोरखनाथ” जैसी उपाधियों से सम्मानित किया गया। इनकी प्रमुख रचनाऐं हे – “जूही की कली”, “शकुंतला”, “कुकुरमुत्ता” आदि। 

कहा जाता हे की, जब इनकी उम्र 3 वर्ष थी, तब इनकी माताजी का निधन हो गया। और जब ये युवावस्था में पहुंचे, तब इनके पिताजी ने भी प्राण त्याग दिए। इनका जन्म “रविवार” को हुआ था, जिस कारण इनका जन्मनाम “सूर्यकुमार” रखा गया। वहीं छायावाद के प्रमुख कवि होने के कारन इन्हे “निराला” नाम से सम्मानित किया गया।  

सन् 1917 में इन्होने अपना नाम “सूर्यकुमार” से बदल कर “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला” रख लिया। इनकी पत्नी, इनके लिए एक प्रेरणास्त्रोत थी और संगीत और साहित्य में इनकी रुचि का एक कारण भी। 

प्रथम विश्व-युद्ध के बाद फैली महामारी के कारण इनकी पत्नी, भाई, चाचा और बेटी “सरोज” की मृत्यु हो गई।अपनी बेटी के चले जाने के कारण इन्हे बहुत ज्यादा दुःख हुआ। 

अपनी कविताओं, उपन्यासों और निबंधों से, हिंदी साहित्य में अपना अमूल्य योगदान देने वाले, “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला” की 15 अक्टूबर 1961 ई० को मृत्यु हो गई। 


Suryakant Tripathi Nirala poems (प्रमुख कविताएँ) :

निराला जी ने सर्वप्रथम “जन्मभूमि” कविता की रचना की थी, जो बेहद प्रसिद्ध हुई। लेकिन, कुछ साहित्यकार “जूही की कली” को इनकी पहली रचना मानते हैं। 
  • विधवा 
  • भिक्षुक 
  • बादल राग 
  • वह तोड़ती पत्थर 
  • संध्या सुंदरी 
  • गरम पकोड़े 

Suryakant Tripathi Nirala ki rachnaye (निराला की प्रमख रचनाएँ) :

इन्होने अपने जीवन काल में कई प्रसिद्ध कविता, निबंध, नाटक और कहानियों की रचना की। तो अब हम इनकी रचनाओं के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे- 

प्रमुख काव्य संग्रह :

  • अप्सरा – रचना वर्ष (1931)
  • अलका – वर्ष (1933)
  • प्रभावती – रचना वर्ष (1936)
  • निरुपमा – वर्ष (1936)
  • कुली-भाँत – रचना वर्ष (1938 से 1939) 
  • बिल्लेसुर बकरिहा – रचना वर्ष (1942)


प्रमुख नाटक :

  • शकुंतला 


कहानी संग्रह :

  • सुकुल की बिवी 
  • लिली 
  • देवी 
  • सखी 
  • श्रीमती गजानंद देवी 
  • चतुरी चमार 
प्रमुख काव्य संग्रह :
  • अनामिका – रचना वर्ष (1923)
  • परिमल – रचना वर्ष (1923)
  • गीतिका – रचना वर्ष (1936)
  • तुलसीदास – रचना वर्ष (1939)
  • अपरा 
  • कुकुरमुत्ता – रचना वर्ष (1942)
  • अर्चना – रचना वर्ष (1950)
  • राम की शक्ति पूजा
  • आराधना – रचना वर्ष (1955)
  • अणिमा – रचना वर्ष (1943)
  • बेला
  • नए पत्ते – रचना वर्ष (1946)
  • गीत गूंज – रचना वर्ष (1954) 


सम्पादन :

  • मतवाला 
  • सुधा
  • समन्वय पत्रिका 

जब “सूर्यकांतजी”, रामकृष्ण आश्रम में ठहरे हुए थे, तब उन्होंने “समन्वय पत्रिका” का सम्पादन किया था। 

Suryakant Tripathi Nirala ka sahityik parichay in Hindi (साहित्यिक विशेषताएं) :

स्वच्छंदतावादी कविता के आधार स्तम्भ, “निराला” का साहित्यिक संसार बहुत विराट हे, जिसकी साहित्यिक विशेषताएं निमनिखित हे :- 

  1. ये “ओज” और “जागरण” के कवी हैं।
  2. इन्होने अपनी रचनाओं में आम आदमी के जीवन से जुड़ी समस्याओं का चित्रण किया।
  3. इनकी रचनओं में, विपरीत परिस्तिथि में भी हार न मानकर, नए अवसरों को तलाशने की सिख मिलती हैं।
  4. निराला ने अपनी रचना “भिक्षुक” में आम बोल-चाल की भाषा का बहुत सुन्दर तरीके से प्रयोग किया।
  5. त्रिपाठीजी की काव्य रचनाएं “दार्शनिक विचारधाराओं” से ओतप्रोत हैं। 
  6. इन्होने जन-जीवन, प्रकृति, इतिहास, पुराण आदि से शब्द लेकर अपने काव्यों कि रचना की।
  7. इनके रचनागीतों में “संगीतात्मकता”, “संक्षिप्तता” और “प्रतीकात्मकता” का भाव हैं।

अपनी रचनाओं में “कभी हार ना मानने” कि सिख देने वाले “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला”, ने अपनी जीवन में भी हर विपरीत परिस्तिथि में अपनी अंतर-शक्ति को पहचाना और कठिनाइयों का सामना किया। 


Suryakant Tripathi Nirala awards and achievements (उपलब्धियां) :

इस महान साहित्यकार को कई उपनाम और उपाधियों से सम्मानित किया गया :

  • निराला 
  • छायावाद का महेश 
  • दारागंज का संत 
  • दिनों का मसीहा 
  • आधुनिक काल का गोरखनाथ 
  • महाप्राण 
  • औढरदानी 
  • कठिन काव्य का प्रेत 


Unknown facts about poet nirala (अनसुने तथ्य) :

  1. इनका जन्म नाम “सूर्यकुमार” था।
  2. पत्नी के कारण, साहित्य और संगीत में इनकी रुचि प्रबल हुई।
  3. ये स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के अनुयायी थे।  
  4. “निराला” साहित्यिक रचनाओं से जुड़ी कलाओं के धनि थे। 
  5. इनकी समस्त रचनाओं का समूह, “निराला ग्रंथावली” नाम से 8 भागों में प्रकाशित हुआ।
  6. इनका काव्य सौंदर्य, घनिष्ट चिंतन की अमूल्य निधि हे।
  7. ये हिंदी के प्रमुख “स्वछंदतावादी कविता” के आधार – स्तम्भों में से एक हैं।

Final words on Suryakant Tripathi Nirala biography in hindi (उपसंहार) :

“निराला” ने अपनी रचनाओं से समाज के लिए एक पथ – प्रदर्शक का भी काम किया। इतना ही नहीं इन्होने अपनी रचनओं में ज़्यादा से ज़्यादा गरीब और सामान्य लोगो की पीड़ा का भावपूर्ण चित्रण किया, जिससे की वह समाज को इनकी पीड़ा से अवगत करा सके।
इस लेख के माध्यम से हमने आपको, साहित्यिक विशेषताओं के धनि “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला” के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां, उनकी रचनाएं, काव्यगत विशेषताएं, आदि के बारे में बताने का प्रयास किया।
आपको यह लेख केसा लगा, हमे ज़रुर बताएं और अगर आप इसमें किसी प्रकार का बदलाव चाहते हे तो हमे कमैंट्स में सुझाव दे।
धन्यवाद!!

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