About Swami Vivekananda in Hindi Biography | Swami Vivekanand Ki Jivani, Speech

About Swami Vivekananda in Hindi Biography : नमस्कार दोस्तों, इस लेख में भारतीय संस्कृति को एक अध्भुत, अकल्पनीय पहचान देने वाले “Swami Vivekanand ki Jivani” पर चर्चा की गई हैं। यहाँ हमने महान स्वामी विवेकानंद के शुरवाती जीवन, परिवार, शिक्षा, शिकागो के भाषण इत्यादि की समस्त जानकारी, सिमित शब्दों में बताने का प्रयास किया हैं।

तो चलिए अब “बालक नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद” बनने तक के सफर का मज़ा उठाते हैं।

About Swami Vivekananda in Hindi Biography | Swami Vivekanand Ki Jivani, Speech
Swami Vivekanand Biography & Images

Quick overview of Swami Vivekanand biography in Hindi :

  • नाम – स्वामी विवेकानंद
  • जन्म नाम – नरेन्द्रनाथ दत्त
  • जन्म – 12 जनवरी 1863
  • स्थान – कलकत्ता (भारत)
  • पिता – श्री विश्वनाथ दत्त
  • माता – भुवनेश्वरी देवी
  • पत्नी – अविवाहित
  • मृत्यु – 4 जुलाई 1902
  • स्थान – बेलूर मठ (बंगाल)
  • उम्र – 39 साल

 

Swami Vivekanand ki Jivani (जीवन परिचय) :

क्या आप जानते हैं? एपीजे अब्दुल कलाम, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, सुभाषचंद्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री, आदि में क्या समानता थी? हम बताते हैं। तो, इन सभी के प्रेरणा स्त्रोत थे – स्वामी विवेकानंद।

एक महान और तेजस्वी व्यक्तित्व के धनि स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को मकर सक्रांति के अवसर पर कलकत्ता में हुआ था। इनके पिता का नाम “श्री विश्वनाथ दत्त” था जो कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील थे। साथ ही इनकी माता का नाम “भुवनेश्वरी देवी” था।

अपने छोटे से जीवन काल में स्वामीजी ने कई अलौकिक कार्य किए और दुनिया भर में अपने ज्ञान का परचम लहराया। इनके जीवन की कई और रोचक घटनाओं का विवरण आगे दिया गया हैं।

Swami Vivekanand ke janm ki kahani :

स्वामी विवेकानद जी के जन्म की एक कहानी बहुत ही प्रचलित हैं। आपको बतादें की इनकी माताजी एक धर्म परायण महिला थी और हमेशा भगवान् से ऐसे संतान की कामना करती जो उनके कूल का नाम रोशन करें।

कहा जाता हैं की, विवेकानंद के जन्म से पहले, भगवान् शिव उनकी माता के सपने में आए और कहा की में तुम्हरी संतान के रूप में जन्म लेने वाला हूँ। ये बात से सब बहुत खुश हुए।

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Nickname – नरेंद्र :

स्वामीजी का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जिसमे सभी बहुत पढ़े-लिखे और समझदार थे। साथ ही सब की समाज में बहुत इज़्ज़त थी। जन्म के समय इनका नाम “नरेंद्रनाथ दत्त” रखा गया।

लेकिन, हर कोई इन्हे प्यार से “नरेंद्र” कहकर सम्भोदित करता था।

Swami Vivekanand nibandh (पुस्तकालय की कहानी) :

वैसे तो बचपन से ही स्वामी विवेकानंद बहुत ही करुणावान, जागृत और होशियार थे। इनकी तेज बुद्धि का अंदाजा इस एक घटना से लगाया जा सकता हैं।

बचपन में नरेंद्र, एक पुस्तकालय से रोज़ कुछ किताबें ले कर आते और अगले ही दिन उन्हें लौटाकर आ जाते। तब वहां के कर्मचारी ने पुछा की –

बेटा नरेंद्र! तुम ये किताबें पढ़ने के लिए ले जाते हो या सिर्फ देखने के लिए।

तब इन्होनें जवाब दिया की, में एक बार में ही पूरी पुस्तक को याद कर लेता हूँ। आप चाहे तो कुछ भी पूछ सकते हैं। इस पर वह कर्मचारी एक पृष्ट क्रमांक बताता हे।

तो स्वामी विवेकानंद बिना विचलित हुए, सभी जानकारी सुना देते हैं और सबको अचंभित कर देते हैं।

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Swami Vivekanand ki Kahani 2 :

ये हमेशा से सादगी प्रिय और उच्च विचारों वाले व्यक्ति थे। ये हमेशा हिन्दू-मुस्लिम, आमिर-गरीब पर लड़ने वालों से सीधे सवाल किया करते और सबको सही पाठ पढ़ाने का प्रयास करते।

 

Swami Vivekanand कैसे बने संत :

बचपन में इन्होने सोते हुए 2 सपने देखे। जिन्होंने इन्हे बालक नरेन्द्रनाथ से स्वामी विवेकानंद बना दिया।

स्वप्न 1 : इसमे इन्होने एक बहुत ही धनवान, प्रतिष्ठित और अपार सफल इंसान को देखा।

स्वप्न 2 : दूसरे स्वप्न में इन्होनें एक सन्यासी को देखा। जिसे किसी भी मोहमाया की पर्वाह नहीं थी। वह केवल समाज कल्याण और ईश्वर की आराधना में ही अपने जीवन की सार्थकता को देखता हैं।

तब स्वामी विवेकानंद ने सन्यासी जैसा जीवन बिताने का निर्णाय लिया और हर प्रकार की सांसारिक वस्तु से दुरी बनाने का निर्णाय किया।

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Education (भ्रम्म समाज से जुड़ाव) :

सन्यासी जीवन जीने के इच्छुक स्वामी विवेकनन्द परमात्मा को देखना चाहते थे। इसलिए वे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जिसने भगवान् को देखा हो।

तब स्वामीजी भ्रम्म समाज से जुड़ गए। लेकिन, वे संतुष्ट नहीं थे। वे अपनी योग शिक्षा और वैदिक ज्ञान को पूरी दुनिया में फैलाना चाहते थे।

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Swami Vivekanand Guru (रामकृष्ण परमहंस) :

उस समय रामकृष्ण परमहास काफी चर्चा में थे। तो स्वामी विवेकानंद ने तर्क-वितर्क करने के उद्देश्य से दक्षिणेश्वर मंदिर के रामकृष्ण परमहंस के पास जाने का निर्णय लिया।

लेकिन, स्वामी विवेकानंद बहस के दौरान उनके विचारों से बहुत प्रभावित हुए और रामकृष्ण परमहंस को ही अपना गुरु बनाने का निर्णय लिया।

Ramkrishna Paramhans Death :

16 अगस्त 1886 को कलकत्ता में स्वामी विवेकानंद के गुरु – “रामकृष्ण परमहंस” ने अपना देह त्याग दिया। जिसके बाद सभी शिष्यों और आश्रम की ज़िम्मेदारियाँ स्वामीजी पर आ गई।

लेकिन, इन्होंनें बड़ी ही सूझ-बुझ से अपने कर्तव्य का निर्वाह किया।

Swami Vivekanand Chicago journey :

महज़ 20 वर्ष की उम्र में गेरुआ वस्त्र धारण कर पूरी दुनिया को आध्यात्म का गुण सीखाने के लिए निकल पड़े। इसी कड़ी में वर्ष 1893 में स्वामी विवेकानंद, अमेरिका के “शिकागो” शहर में “शिकागो विश्व धर्म परिषद” में पहुंचे।

उस वक्त ये भारत के प्रतिनिधि के रूप में वहां गए थे। लेकिन, वहां लोगों ने उनके पहनावे का मज़ाक उड़ाया लेकिन, वे ज़रा भी विचलित नहीं हुए।

 

Chicago speech of Swami Vivekananda :

कार्यक्रम में मौजूद, एक प्रोफेसर की सहायता से स्वामीजी को मंच पर एक भाषण देने का मोका मिला। जिसके बादवो वो हुआ जिसने वहां मौजूद सभी श्रोताओं समेत पूरी दुनिया के लोगो को अचंभित कर दिया।

स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरवात में “अमेरिका के मेरे प्रिय – भाइयों और बहनों” इस पंक्ति से की। जिस पर सभी लोग चकित होकर तालियां बजने लगें।

वैसे तो स्वामीजी को बहुत सिमित समय दिया गया था। लेकिन, उनके भाषण में सब इतने लीन हो गए की किसी को समय का भान ही नहीं रहा।

20 मिनट से ज्यादा समय तक चले उस भाषण ने स्वामी विवेकानंद को पूरी दुनिया में अलग पहचान दिलाई और पूरी भारतीय संस्कृति की शान बढ़ाई।

Teachings of Swami Vivekanand :

4 सालों तक पूरी दुनिया को आध्यात्म का पाठ पढ़ने के बाद वर्ष 1897 में स्वामी विवेकानंद भारत लोट आए। अब वे भारत के लोगों के बिच अध्यात्म का प्रचार करने लगे।

साथ ही इन्होनें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए लोगों को प्रेरित किया।

 

Swami Vivekanand Books in Hindi :

  1. राज योग (Raja Yoga)
  2. कर्म योग (Karma Yoga)
  3. वेदांत दर्शन – 1 (Vedant Philosophy)
  4. वेदांत दर्शन – 2 (based on Jnana yoga)
उपयुक्त पुस्तकें, स्वामी विवेकानंद के जीवन काल (जीवीत रहते हुए) प्रकाशित हुई थी।

Swami Vivekanand Books published after death :

  1. भक्ति योग (Bhakti Yoga)
  2. स्वामी विवेकानंद के हस्तलिखित कार्यों का समूह
  3. पूरब और पश्चिम (The East or West)
  4. योग (Yoga in Telugu)
  5. प्रेरित वार्ता (Inspiring Talks)
  6. विवेकवानी (Vivekavani)
  7. नारद भक्ति सूत्र (Narad Bhakti Sutras)
  8. राज योग (Raaj Yoga)
  9. ज्ञान योग (Jnana Yoga)
  10. परम भक्ति (Supreme Devotion)

Founder of Ramkrishna Mission (रामकृष्ण मिशन की शुरवात) :

स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में “रामकृष्ण मिशन” की शुरवात की। जिसका मुख्य उद्देश्य समस्त लोगों को धार्मिक, आध्यात्मिक, शैक्षणिक जागरूपता का बोध कराना।

 

Swami Vivekanand death (स्वामी विवेकानंद की मृत्यु का कारण) : 

अनगिनत लोगों को बहुत कम समय में आध्यात्म और जीवन का असली मतलब समझने वाले स्वामी विवेकानंद का 4 जुलाई 1902 को केवल 39 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

लेकिन, इनके द्वारा की गई रचनाएं और ज्ञान की बातें आज भी भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग के रूप में मौजूद हैं।

 

FAQs on Swami Vivekanand :

प्रश्न 1 : स्वामी विवेकानंद की पत्नी का नाम क्या था?
उत्तर : एक सन्यासी जीवन जीने के इच्छुक स्वामी विवेकानंद ने कभी शादी नहीं की।
प्रश्न 2 : स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित “कर्म योग” और “माय मास्टर” का प्रकाशन वर्ष क्या हैं?
उत्तर : 
  • कर्म योग – रचना वर्ष (1896)
  • माय मास्टर – रचना वर्ष (1901)
प्रश्न 3 : रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जी की सर्वप्रथम भेंट कहा हुई?
उत्तर : दक्ष्णिनेश्वर मंदिर में।
प्रश्न 4 : स्वामी विवेकानंद जी को योद्धा – सन्यासी क्यों कहा जाता हैं?
उत्तर : बेहद कम उम्र से ही ये एक सन्यासी की तरह रहते और अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए तत्पर रहें। इसलिए इन्हें योद्धा – सन्यासी के नाम से जाना जाता हैं।
प्रश्न 5 : अमेरिका के शिकागो शहर में जाते समय स्वामी विवेकानंद जी की उम्र कितनी थी?
उत्तर : 30 वर्ष।

Final words about Swami Vivekananda in Hindi biography :

तो दोस्तों, हम आशा करते हैं की आपको Swami Vivekanand की Hindi biography पढ़कर बहुत प्रोत्साहन मिला होगा।

यदि हमारे द्वारा दी गई जानकारी जैसे – Swami Vivekanand jivni, family, education, Chicago speech, Books, jeevan parichay, इत्यादी में किसी प्रकार के सुधर की आवश्यकता हो तो हमें कमैंट्स में ज़रूर बताएं।

धन्यवाद!!

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